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साहित्यकार का न कोई एक पृष्ठ होता है न कोई भूमि-आशुतोष
रायपुर, 18 जनवरी। प्रभा खेतान फाउंडेशन, अभिकल्प फाउंडेशन के तत्वाधान में कलम रायपुर की 50वीं कड़ी का आयोजन राजधानी के होटल हयात में किया गया। श्री सीमेंट इस कार्यक्रम के प्रायोजक थे। इस कार्यक्रम में बतौर मेहमान लेखक युवा सहित्यकार आशुतोष भारद्वाज शामिल हुए। राहुल सिंह ने इस कार्यक्रम में लेखक से बातचीत की।
बातचीत में आशुतोष ने कहा कि बतौर साहित्यकार न उनका कोई पृष्ठ है न ही कोई भूमि। क्योंकि उनकी अपनी यात्रा अनेक राज्यों और शहरों से गुजरी है जिन्होंने उनके साहित्यिक समझ को प्रभावित किया है। छत्तीसगढ़ में करीब पाँच साल एक पत्रकार के रुप में बिताने वाले आशुतोष ने इस कहा कि इस प्रदेश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और वह आज जो भी हैं उसमें छत्तीसगढ़ के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
प्रदेश के साहित्यकारों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं में एक सच्चा, सीधा-सादा और भोलाभाला छत्तीसगढ़ बसता है। अपनी किताब पितृ वध पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हर साहित्यकार के लेखन में उसके पूर्वज लेखकों की आत्मा अपने आप शामिल हो जाती है और हर बार लेखक को अपने पितामह लेखकों की लेखनी का वध करते हुए आगे बढ़ना होता ताकि उनकी छाप से आगे बढ़कर अपना कुछ मौलिक रचना कर सके। आज की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आशुतोष ने कहा कि आज के लेखकों के बीच वर्तमान वाद चल रहा है। वे आज कुछ भी लिखकर तत्काल सोशल मीडिया में कुछ लाइक और कमेंट चाहते हैं। हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए किताबें हमेशा रहती हैं और हमेशा रहेंगी।
कार्यक्रम में गौरव गिरिजा शुक्ला संस्थापक अभिकल्प फाउंडेशन ने कलम में शामिल हुए सभी 50 कड़ियों साहित्यकारों को याद करते हुए सभी आयोजन के बारे में जानकारियाँ दी। साथ ही पृथा शुक्ला ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। वरिष्ठ साहित्यकार और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी इंदिरा मिश्रा ने आशुतोष भारद्वाज को स्मृति चिह्न भेंट किया और जया जादवानी ने राहुल सिंह को मेमेंटो भेंट किया।


