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वोराजी की कुछ यादें, अपनी-पराईं....
22-Dec-2020 8:54 AM
वोराजी की कुछ यादें, अपनी-पराईं....

-सुदीप ठाकुर 

मोतीलाल वोरा जी से जुड़ी बातें बचपन से सुनता आया हूं। राजनांदगांव के दिवंगत कवि और मुक्तिबोध के मित्र नंदूलाल चोटिया याद करते थे कि किस तरह वोरा जी एक समय साइकिल से चलते थे। तब वह समाजवादी राजनीति से जुड़े हुए थे। बाद में वह रहने के लिए राजनांदगांव से दुर्ग चले गए थे। राजनांदगांव के समाजवादी नेताओं मदन तिवारी, जेपीएल फ्रांसिस और विद्याभूषण ठाकुर से उनके काफी करीबी संबंध बन रहे। वोरा के मुख्यमंत्री बनने और इन नेताओं के विपक्ष में होने के बावजूद उनके संबंध बेहद सहज बने रहे। ये नेता उन्हें अक्सर राजनांदगांव के उन दिनों की याद दिलाते थे, जब वह भी वहां के श्रमिकों, किसानों और आदिवासियों के आंदोलन का हिस्सा हुआ करते थे। इन तीनों समाजवादी नेताओं का पहले ही निधन हो चुका है। वोरा जी राजनीति में आने से पहले राजनांदगांव से प्रकाशित अखबार सबेरा संकेत और रायपुर से प्रकाशित नवभारत से बतौर पत्रकार भी जुड़े थे। 1960 में जब रायपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का अधिवेशन हुआ था, तो उसे उन्होंने बतौर पत्रकार ही कवर किया था। इस अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर कांग्रेस के सारे बड़े नेता शामिल हुए थे। इसी अधिवेशन के समय पुराने मध्य प्रदेश के दिग्गज आदिवासी नेता लालश्याम शाह तीस हजार से भी अधिक आदिवासियों के साथ महाराष्ट्र सीमा से सटे मानपुर मोहला से पैदल रायपुर पहुंच थे। अपनी किताब लाल श्याम शाह एक आदिवासी की कहानी के शोध के दौरान वोरा जी से कई बार मुझे मिलने का मौका मिला। इस पोस्ट के साथ की तस्वीर तब की है, जब मैंने उन्हें अपनी किताब भेंट की थी।  

करीब पांच दशक पूर्व वोरा जी के प्रयास और उनकी सक्रियता से आम लोगों से चंदा लेकर राजनांदगांव के पुराने बस अड्डे में गांधी की एक प्रतिमा स्थापित की गई थी। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उलझने के बाद छत्तीसगढ़ और राजनांदगांव उनसे दूर होते चले गए... सादर नमन


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