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भारत अपनी चुनाव मशिनरी का इस्तेमाल कोरोना वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए करेगा. छह से आठ महीने तक चलने वाले इस वैक्सीन प्रोग्राम के लिए देश भर में फैले कोल्ड स्टोरेज को इस्तेमाल में लाया जाएगा. कोरोना के सबसे ज्यादा जोखिम वाले साठ करोड़ लोगों को सबसे पहले कोरोना वैक्सीन दिए जाने की सरकार की योजना है.
इस योजना की अगुवाई करने वाले अधिकारी ने शुक्रवार को इस बारे में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को जानकारी दी. वीके पॉल विशेषज्ञों के उस दल के मुखिया है जो कोविड-19 के वैक्सीन कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री को सलाह देती है.
उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि सरकार ने 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर वैक्सीन स्टोर करने के लिए कोल्ड स्टोरेज तैयार कर लिए हैं.
वीके पॉल ने बताया कि सरकार की मौजूदा तैयारी उन चार वैक्सीनों की जरूरतों को पूरा करती है जो लगभग बनकर तैयार हो चुके हैं.
इंटरव्यू में उन्होंने बताया,“सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक, ज़ायडस और स्पुतनिक-वी जैसी चार वैक्सीनों के लिए सामान्य कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है. मैं इन वैक्सीनों के मामले में कोई समस्या नहीं पाता हूँ.”
दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया एस्ट्राज़ेनेका की ओर से विकसित किए गई वैक्सीन कोविशिल्ड का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में लगी हुई है.
जबकि भारत बायोटेक और ज़ायडस कैडिला अपनी वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है.
पिछले महीने भारत की दवा कंपनी हेटेरो ने रूस की आरडीआईएफ़ से समझौता किया है. इस समझौते के तहत भारत में एक करोड़ रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी तैयारी की जाएगी.
वीके पॉल ने बताया कि उम्मीद है कि वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए बहुत जल्द ही स्वतंत्र दवा नियामक अनुमति के लिए आवेदन करेंगे.
हालांकि अभी भी सरकार की ओर से औपचारिक तौर पर वैक्सीन की क़ीमत को लेकर विचार-विमर्श किया जाना है.
वीके पॉल कहते हैं,“भारतीय कंपनियों पता है कि सरकार उचित क़ीमत ही रखने के पक्ष में ही होगी.” (bbc.com)


