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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 10 दिसंबर। एनआरडीए में अफसरों की वाहन सुविधा वापस लेने का प्रस्ताव है। शुक्रवार को एनआरडीए बोर्ड की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा। एनआरडीए अफसर खुद के वाहन अथवा बस से आना-जाना करेंगे। इससे एनआरडीए को प्रतिमाह लाखों की बचत होगी।
पूर्व सीएस आरपी मंडल ने एनआरडीए में अपव्यय रोकने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इस कड़ी में एनआरडीए में किराए के वाहनों को हटाया जा रहा है। बताया गया कि एनआरडीए में दर्जनभर अफसर किराए के वाहन से आना-जाना कर रहे थे। निजी ट्रेवल्स एजेंसी से 12 वाहन किराए पर ली गई थी। इस पर करीब साढ़े 4 लाख रुपये हर महीना एजेंसी को भुगतान किया जा रहा था।
जिन अफसरों को वाहन सुविधा दी गई थी, उनमें 4 डिप्टी कलेक्टर, 2 नायब तहसीलदार, 1 तहसीलदार, महाप्रबंधक और प्रबंधक व इंजीनियर हैं। इसके अलावा एनआरडीए में काम करने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनियों से भी वाहन सुविधा ली जा रही थी। एनआरडीए के टेंडर में एक प्रावधान यह भी रखा गया था कि कंपनी एनआरडीए को वाहन उपलब्ध कराएगी। कुल मिलाकर 8 गाड़ी निजी कंपनियों से एनआरडीए के अफसरों को मिली हुई थी, कंपनियों ने निजी ट्रेवल्स एजेंसी के माध्यम से अफसरों को वाहन उपलब्ध कराई गई थी। ये वाहन भी वापस किए जा रहे हैं। बदले में कंपनियां एनआरडीए को तय राशि देगी। इस तरह एनआरडीए को लाखों रुपये मिलने की उम्मीद है।
एनआरडीए बोर्ड ने इस आशय का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। शुक्रवार को बोर्ड की बैठक में वाहन सुविधा वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की उम्मीद हैं। बदले में अफसरों को एनआरडीए सरकार द्वारा निर्धारित वाहन भत्ता उपलब्ध कराएगी। बोर्ड के अफसरों का कहना है कि वैसे भी वित्त विभाग के नियमों के अनुसार संयुक्त संचालक से नीचे के अफसर को वाहन की पात्रता नहीं है। मगर निगम-मंडलों में प्रबंधक और निचले स्तर के अफसर वाहन सुविधा मिल जाती है। एनआरडीए की माली हालत ठीक नहीं है, इसलिए अपव्यय रोकने की दिशा में कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इससे हर महीने लाखों की बचत होगी।


