ताजा खबर

दंतेवाड़ा में बेहतर स्वास्थ्य-पोषण पर ग्रामीणों को सुझाव देंगी गांव की दादियां
08-Dec-2020 12:50 PM
दंतेवाड़ा में बेहतर स्वास्थ्य-पोषण पर ग्रामीणों को सुझाव देंगी गांव की दादियां

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दंतेवाड़ा, 8 दिसंबर।
जिले में पोषण का स्तर बेहतर बनाने के लिए एक अभिनव पहल की जा रही है। इस पहल के तहत जिले के सभी 239 गांवों में बुजुर्ग महिलाएं मिलकर स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देंगी। बापी ना उवैट (गोंडी भाषा में दादी के नुस्खे) नाम से की जा रही यह पहल, जिला प्रशासन द्वारा संचालित और यूनिसेफ द्वारा समर्थित है। इसे दंतेवाड़ा में 10 दिसंबर को लॉन्च किया जाएगा।

अभियान के तहत जिले के हर गांव के लिए एक बापी (दादी) होंगी, जो  परिवारों और ग्रामीणों से बात कर उन्हें पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बच्चों की देखभाल और कोरोना रोकथाम जैसे विषयों पर सलाह देंगी। उन्हें व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी प्रेरित करेंगी। इन बुजुर्ग महिलाओं को महिला शक्ति केंद्र के ग्राम स्वयंसेवकों द्वारा सहायता दी जाएगी।

बापी कार्यक्रम का एक मैस्कॉट और एक थीम गीत भी है, जिसकी रचना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई है। बापियों का चयन गांवों से किया जाएगा,  जो स्वैच्छिक रूप से इस कार्यक्रम से जुड़ेंगी। बापी और गांव के स्वयंसेवकों का पारस्परिक संचार-कौशल, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान जैसे सरकारी कार्यक्रमों, बाल कुपोषण, बाल मृत्यु और एनीमिया कम करने आदि विषयों पर उन्मुखीकरण किया जाएगा।

यूनिसेफ चीफ जॉब जक़रिया ने कहा है कि यह एक अनूठी पहल है, क्योंकि यह पहली बार हुआ है कि गांव स्तर के संचारकों और प्रभावी लोगों का कैडर गठित किया गया है, ताकि बाल कुपोषण, एनीमिया और बाल मृत्यु जैसी समस्याओं को दूर किया जा सके। गांवों में टीकाकरण, पोषण, एनीमिया में कमी, किशोर स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सरकारी सेवाओं को बढ़ावा देने का काम बापियों द्वारा प्रभावी रूप से किया जा सकेगा। यह कार्यक्रम अन्य जिलों और राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।

कलेक्टर दीपक सोनी कहते हैं-बापियों को उनकी समझदारी और अनुभव के कारण समुदाय में सम्मान दिया जाता है और इसलिए वे माताओं, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और समुदाय के सदस्यों को स्वास्थ्य और पोषण पर महत्वपूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित करने में सक्षम हैं। यूनिसेफ की तकनीकी विशेषज्ञता से इन्हें बच्चे और किशोर कल्याण के लिए काम करने में मदद मिलेगी।  यूनिसेफ के सी4डी विशेषज्ञ अभिषेक सिंह कहते हैं- गांवों में इन विशेष संचार दूतों की मदद से समुदाय के पिछड़े वर्ग भी आवश्यक सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।


अन्य पोस्ट