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किसानों के भारत बंद से जुड़ी ख़ास और बड़ी बातें
08-Dec-2020 8:42 AM
किसानों के भारत बंद से जुड़ी ख़ास और बड़ी बातें

किसानों का 'भारत बंद' यूँ तो आज, 8 दिसंबर को है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक हलचल एक दिन पहले ही शुरू हो गई थी.

लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस समाजवादी पार्टी की गतिविधियों पर नज़र रख रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को ही कहा था कि 'वे किसानों की माँगों को वाजिब मानते हैं और वे किसानों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का समर्थन करेंगे.' पर सोमवार सुबह यूपी पुलिस ने उनके घर के बाहर डेरा डाल दिया.

मोदी सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पंजाब और हरियाणा के किसान बीते 12 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर डेरा जमाया हुआ है. साथ ही, देश के कई ज़िलों में किसानों का प्रदर्शन जारी है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को सिंघु बॉर्डर का दौरा किया, जहाँ इस वक़्त प्रदर्शनकारी किसानों का सबसे बड़ा डेरा है. उन्होंने दोहराया कि 'आम आदमी पार्टी किसानों के साथ है.'

केंद्र सरकार ने किसानों से अपील की थी कि वो ऐसे किसी बंद का आह्वान ना करें और बच्चों व बूढ़ों को प्रदर्शन स्थलों से घर भेज दें. सरकार ने कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए किसानों से यह अपील की थी.

लेकिन किसानों ने सरकार की यह अपील ठुकराते हुए 8 दिसंबर के भारत बंद का आह्वान किया है. किसान चाहते हैं कि केंद्र सरकार तीनों नये कृषि क़ानूनों को वापस ले. किसानों का कहना है कि इस नए क़ानून के कारण उन्हें अपना अनाज औने-पौने दाम पर बेचना होगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था ख़त्म हो जाएगी.

इसे लेकर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत जारी है. पाँच चरण की वार्ता हो चुकी है जो अब तक बेनतीजा रही. बुधवार, 9 दिसंबर को यानी भारत बंद के ठीक एक दिन बाद, सरकार और किसान संगठनों में छठे चरण की वार्ता होनी है.

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार किसानों के प्रदर्शन से दबाव में है. किसानों से वार्ता में शामिल कुछ केंद्रीय मंत्रियों के बयानों से ऐसे संकेत मिले हैं कि सरकार पीछे हट सकती है.

प्रदर्शनकारी किसानों का केंद्र सरकार से अब यही सवाल है कि वो नये कृषि क़ानून वापस ले रही है या नहीं

इस बीच ना सिर्फ़ मुख्य विपक्षी दलों, बल्कि बीजेपी के कुछ सहयोगी दलों ने भी किसानों की माँगों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा है कि वो मंगलवार को भारत बंद के समर्थन में रहेंगे.

भारत बंद को ध्यान में रखते हुए हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर, जो अब तक प्रदर्शन के सबसे बड़े केंद्र रहे हैं, वहाँ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की तैयारी की है.

अब तक क़रीब 18 राजनीतिक पार्टियों ने कहा है कि वो किसानों के भारत बंद के समर्थन में हैं.

सोमवार सुबह बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, "कृषि से संबंधित तीन नये क़ानूनों की वापसी को लेकर पूरे देश भर में किसान आंदोलित हैं. उन्होंने 8 दिसंबर को जिस भारत बंद का ऐलान किया है, बीएसपी उसका समर्थन करती है. साथ ही केंद्र सरकार से अपील करती है कि वो किसानों की माँगों को माने."

इससे पहले शिवसेना ने भारत बंद के समर्थन की घोषणा की थी. पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि 'किसानों के प्रति हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी के नाते देश की जनता को किसानों के बंद में स्वेच्छा से हिस्सा लेना चाहिए.'

इससे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, डीएमके चीफ़ एम के स्टालिन, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के चीफ़ अखिलेश यादव, लेफ़्ट फ़्रंट के सीताराम येचुरी और डी राजा समेत भारत के 11 बड़े राजनेताओं ने किसानों के भारत बंद के समर्थन की बात कही थी.

एक संयुक्त बयान जारी करते हुए, भारत की 11 राजनीतिक पार्टियों ने कहा कि मोदी सरकार ने 'ग़ैर-लोकतांत्रिक तरीक़े से' इन क़ानूनों को संसद में पास किया जिनपर कोई चर्चा नहीं की गई.

इन दलों ने अपने बयान में दावा किया है कि इससे भारत में खाद्य संकट बढ़ेगा, किसानों की परिस्थितियाँ और बिगड़ जायेंगी, साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ना मिलने की वजह से भारतीय कृषि क्षेत्र की दशा बिगड़ेगी.

वहीं शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, अकाली दल, आम आदमी पार्टी और बीजेपी के सहयोगी - असम गण परिषद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है. हालांकि, संयुक्त बयान पर इन पार्टियों के नेताओं के हस्ताक्षर नहीं हैं.

रविवार को दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा था कि आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं और अधिकारियों से 8 दिसंबर को किसानों के नेतृत्व में भारत बंद का समर्थन करने के लिए कहा है.

कांग्रेस ने कहा है कि 8 दिसंबर को पार्टी भारत के हर ज़िले में प्रदर्शन करेगी. पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी किसानों की माँगों का समर्थन किया है और कहा है कि मोदी सरकार को किसानों की माँगें माननी चाहिए.

26 नवंबर को किसानों के आंदोलन की शुरुआत हुई थी. केंद्र सरकार समझती है कि किसानों को नये कृषि क़ानूनों पर भटकाया गया है और सरकार कहती रही है कि बातचीत से किसानों के 'सभी भ्रम दूर' किये जा सकते हैं.

शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में क़रीब पाँच घंटे लंबी वार्ता हुई. इस बैठक में सरकार ने किसानों को यह आश्वासन दिया कि "कृषि क़ानूनों से एमएसपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, ये राज्य का विषय है और केंद्र सरकार राज्यों की मंडियों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेगी."

लेकिन किसानों ने कहा है कि भारत बंद का कार्यक्रम योजना के अनुसार ही रहेगा.

देश की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी इस बंद का समर्थन किया है.

किसानों ने कहा है कि भारत बंद के दौरान वो दिल्ली को जाने वाली सभी सड़कें ब्लॉक करेंगे. सभी टोल प्लाज़ा रोके जायेंगे और वहाँ प्रदर्शन किया जायेगा.

वामपंथी पार्टियों ने ना सिर्फ़ इस बंद का समर्थन किया, बल्कि अन्य विपक्षी दलों से भी इसका समर्थन करने की अपील की.

सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीएम (एम-एल) और ऑल इंडिया फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ने एक संयुक्त बयान में किसान आंदोलन का समर्थन करने की बात कही है.

इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मज़दूर सभा, सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर और ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर ने भी किसान आंदोलन और किसानों द्वारा बुलाये गए भारत बंद का समर्थन किया है.

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी भारत बंद के दिन प्रदर्शन होने की उम्मीद है. दिल्ली सीमा (सिंघु बॉर्डर और गाज़ीपुर) पर डटे किसानों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों से उनके समर्थन में आने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि सभी मिलकर दिल्ली को घेरें और दिल्ली की सीमाओं को सील करने में उनकी मदद करें. (bbc)


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