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दिल्ली,06 दिसंबर | दिल्ली भारत का ऐसा पहला शहर बनने जा रहा है जहां पर किसी अपराध के पीड़ित को शारीरिक चोट, मानसिक या भावनात्मक आघात और यहां तक की अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता उस मामले का दोषी देगा.
द हिंदू अख़बार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, यह मुआवज़ा दोषी तब देगा जब अंतिम सुनवाई हो चुकी होगी और कोर्ट और पीड़ित इस पर राज़ी होंगे.
यह फ़ैसला एमिकस क्यूरी जी.एस. बाजपेयी और दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील विकास पाहवा द्वारा जमा की गई 'पीड़ित प्रभाव रिपोर्ट' के आधार पर लिया गया है.
कोर्ट जब मुआवज़े की रक़म तय करेगा तो वह पीड़ित द्वारा ख़र्च की गई हर एक रक़म गिनेगा जिसमें पीड़ित की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग से लेकर, इलाज, क़ानूनी ख़र्चे, संपत्ति का नुक़सान और उस पर ब्याज को भी गिनेगा.
अपराध होने के बाद जांच अधिकारी को 'पीड़ित के नुक़सान' और 'आरोपी की आर्थिक हैसियत' को भी रिकॉर्ड करना ज़रूरी होगा.


