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बिहार चुनाव के नतीजे आने में देरी क्यों हो रही है?
10-Nov-2020 4:53 PM
बिहार चुनाव के नतीजे आने में देरी क्यों हो रही है?

पटना, 10 नवम्बर | बिहार चुनाव के नतीजे बेहद दिलचस्प दौर में है. कौन सी पार्टी या गठबंधन जीत की तरफ़ बढ़ रहा है, ये अभी कहना थोड़ा मुश्किल है.

तकरीबन 40-50 सीटें ऐसी हैं जहाँ नबंर एक पार्टी और नंबर दो पार्टी के बीच का अंतर 1,000 वोटों से भी कम का है. ऐसे में चुनाव आयोग का अनुमान है कि फ़ाइनल नतीजों के लिए रात तक इंतजार करना पड़ सकता है. चुनाव आयोग की प्रेस कॉफ्रेंस में ये बात डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर चंद्र भूषण कुमार ने कही है.

नतीजे देरी से आने की वजहें

चुनाव आयोग के मुताबिक़ दोपहर डेढ़ बजे तक 1 करोड़ मतों की गिनती हो चुकी है.

बिहार विधानसभा चुनाव, कोरोना महामारी के दौर में भारत में होने वाले पहले विधानसभा चुनाव थे. चुनाव आयोग ने महामारी के दौरान बचाव के लिए जो भी क़दम उठाने थे, उनके लिए अलग से गाइडलाइन जारी की थी. दरअसल कोरोना महामारी के दौर में हुए इस पहले चुनाव में उन्हें पोलिंग बूथ की संख्या बढ़ानी पड़ी थी.

इस बार साल 2015 के मुक़ाबले 63 फ़ीसद से ज़्यादा पोलिंग बूथ बने थे.

साल 2015 में जहाँ कुल पोलिंग बूथ की संख्या 65 हज़ार थी इस बार उसे बढ़ा कर 1 लाख 6 हज़ार कर दिया गया था.

अब जब पोलिंग बूथों की संख्या बढ़ी है तो जाहिर है ईवीएम की भी संख्या बढ़ेगी.

यानी जहाँ पिछले साल तक केवल 65 हज़ार बूथों पर लगे ईवीएम की गणना होती थी, इस बार वो संख्या लाखों में पहुँच गई है.

यही है चुनावी नतीज़ों में देरी की सबसे बड़ी वजह.

कोरोना महामारी में बदले नियम

पहले हर पोलिंग बूथ पर 1500 लोगों को वोट डालने की इजाज़त होती थी, जो इस बार के चुनाव में घटा कर 1000 लोगों के लिए ही कर दिया गया था.

21 अगस्त को चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी के दौर में होने वाले चुनावों के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की थी. गाइडलाइन के मुताबिक़ मतगणना हॉल में पहले जहाँ 14 टेबल होती थी, इस बार वहाँ केवल 7 टेबल की इजाज़त दी गई है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जा सके.

और ये है नतीजों में देरी की दूसरी बड़ी वजह.

चुनाव आयोग ने मतगणना केंद्रों की संख्या भी 38 से बढ़ा कर 55 जगहों पर कर दी है, ताकि चुनाव नतीजों पर ज़्यादा असर न पड़े.

इस बार किसी भी विधानसभा सीट पर नतीजों की घोषणा के पहले कम से कम 19 राउंड गणना होनी है और अधिक से अधिक 51 राउंड की.

चुनाव आयोग के मुताबिक़ औसत निकाला जाए तो तकरीबन 35 राउंड की गणना के बाद ही किसी विधानसभा सीट के नतीजे घोषित किए जा सकेंगे. 2015 तक हर विधानसभा सीट में तक़रीबन 26 राउंड की गणना होती थी. पाँच साल में वोटरों की संख्या बढ़ने से इसमें इज़ाफा हर साल होता था, लेकिन इस बार ये पिछले सालों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा है.

महामारी की वजह से इस बार मतदान का समय एक घंटे बढ़ा दिया गया था. अति संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर ज़्यादातर मतदान केंद्रों पर मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक किया गया.

बिहार में कुल वोटरों की संख्या इस बार 7.3 करोड़ थी. इस विधानसभा चुनाव में कुल 57 फ़ीसद वोट पड़े हैं. यानी तकरीबन सवा चार करोड़ मतदाताओं ने अपने वोटिंग अधिकार का इस्तेमाल किया है. 

अगर दोपहर एक बजे तक कुल 1 करोड़ वोटों की गिनती हुई है, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 3 करोड़ से ज़्यादा वोटों की गिनती में कितना और वक़्त लगेगा.

चुनाव आयोग की अगली प्रेस कॉफ़्रेंस शाम 6 बजे होगी.(https://www.bbc.com/hindi)


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