ताजा खबर
छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 18 अक्टूबर। मरवाही सीट से पूर्व विधायक अमित जोगी और ऋचा जोगी की जाति प्रमाण पत्र और नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस के आदिवासी नेताओं ने खुशी जताई है। सरकार के मंत्रियों डॉ. प्रेमसाय सिंह, अमर जीत भगत और कवासी लखमा ने कहा कि जो नकली आदिवासी, आदिवासियों के हितों पर नौकरी से राजनीतिक तक नाजायज रूप से लाभ लेते रहे हैं, उस पर रोक लगनी चाहिए।
अमित जोगी का जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ने खारिज कर दिया, जबकि ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निलंबित किया गया है। इस आधार पर मरवाही सीट से दोनों का नामांकन निरस्त हो गया। इस पर कांग्रेस के आदिवासी नेता और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, उद्योग मंत्री कवासी लखमा और कांकेर विधायक शिशुपाल शोरी ने कहा कि आदिवासी समाज लगातार इस बात के लिए मांग करता रहा कि असली आदिवासियों को ही आदिवासियों के हितों का लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस तथा आदिवासी समाज के अनेक सम्मेलनों और कार्यक्रमों में आदिवासी समाज लगातार मांग करता रहा है कि वास्तविक आदिवासियों को ही आदिवासियों के लिए हितों का लाभ मिलना चाहिए और जो नकली आदिवासी आदिवासियों के हितों पर नौकरी से लेकर राजनीति तक नाजायज रूप से लाभ लेते रहे हैं उस पर रोक लगनी चाहिए। मरवाही उपचुनाव में नकली जाति प्रमाण पत्र वालों के नामांकन रद्द किए जाने की घटना इस दिशा में एक बड़ा फैसला है जिसका आदिवासी समाज स्वागत करता है।
राज्यसभा सदस्य फूलो देवी नेताम ने कहा कि राज्य समिति के निर्णय के स्वागत करते हुए कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है स्पष्ट हो गया कि 15 साल तक रमन भाजपा की सरकार में आदिवासी के हक को मारने वाले को संरक्षण दिया था। उन्होंने छानबीन समिति और चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी वर्ग को न्याय मिला है मरवाही की जनता को न्याय मिला है। मरवाही इस वर्ग के लिए आरक्षित था उस वर्ग के अधिकारों को 15 साल तक हनन किया गया फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मरवाही के जनता और छत्तीसगढ़ को धोखे मे रखा गया।
उन्होंने कहा कि 15 साल से रमन भाजपा सरकार का जो षड्यंत्र था जो आदिवासी वर्ग के अधिकार को हनन करने का है उसका आज फर्दाफाश हुआ है। 15 साल तक मरवाही जो नकली आदिवासी की चंगुल में फंस गई थी मरवाही को मुक्ति मिली है। भाजपा और भाजपा के बी टीम के सांठगांठ का फर्दाफाश हुआ है।
बस्तर प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल ने कहा कि लोकतंत्र से जुड़ी एक मजबूत प्रक्रिया का आदिवासी समाज हमेशा से सम्मान करता रहा है और जब कभी भारतीय गणतंत्र के अनुरूप निर्वाचन संपन्न कराए जाने की प्रक्रिया आरंभ होती है तो बहुत जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ इसकी प्रारंभिक प्रक्रिया में भाग लिया जाता है मतदान की प्रक्रिया से इनको अलग करने का आदिवासी समाज स्वागत करता है। यह साबित करता है कि बहुत गंभीरता और संजीदगी के साथ निर्वाचन प्रक्रिया की कार्यवाही संपादित की जा रही है।
बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा कि दोनों का नामांकन निरस्त होने से दूध का दूध पानी का पानी हो गया है। नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप ने कहा कि जोगी परिवार को लेकर आदिवासी होने को लेकर कई अटकलें लगातार चलती रही जिसको लेकर आदिवासी समाज में गहरी नाराजगी भी रही। भारतीय लोकतंत्र के निर्वाचन का यह महत्वपूर्ण आदेश अपने आप में यह सिद्ध करता है कि कौन अपने स्वार्थ के नाम पर जाति या धर्म करता है।


