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30 फीट गहरी खाई में गिरकर आग का गोला बनी कार
15-Jan-2026 12:57 PM
30 फीट गहरी खाई में गिरकर आग का गोला बनी कार

तातापानी महोत्सव के लिए निकले बिलासपुर के दो युवकों की मौत

मदनपुर घाटी का 500 मीटर हिस्सा बेहद खतरनाक, कई हादसे हो चुके

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

कोरबा, 15 जनवरी। तातापानी महोत्सव में शामिल होने निकले दो युवकों के लिए यह सफर आखिरी साबित हुआ। बुधवार तड़के कोरबा जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में कार पुल से नीचे खाई में गिर गई और आग लगने से उसमें सवार दोनों लोगों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। जिस जगह दुर्घटना हुई है, वहां हर साल कई दुर्घटनाएं हो रही है और लोगों की जान जा रही है।

जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना बुधवार सुबह करीब 4 बजे बांगो थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोरगा चौकी के पास हुई। कार मदनपुर के पास अनियंत्रित हो गई और सीधे पुल से लगभग 30 फीट नीचे खाई में जा गिरी। नीचे गिरते ही वाहन में अचानक आग लग गई, जिससे कार कुछ ही पलों में आग का गोला बन गई। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही कार पूरी तरह जल चुकी थी।

हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान गोपाल चंद्र डे (42 वर्ष), पिता मानिक चंद्र डे और अरुण सेन (36 वर्ष), पिता बनारसी लाल सेन के रूप में हुई है। दोनों युवक बिलासपुर शहर के तोरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत देवरी खुर्द के निवासी थे। वे कार क्रमांक सीजी 10 बीएफ 1673 में सवार होकर बिलासपुर से विश्रामपुर स्थित तातापानी महोत्सव में शामिल होने जा रहे थे।

घटना की जानकारी मिलते ही बांगो पुलिस और मोरगा चौकी की टीम मौके पर पहुंची। आग पूरी तरह बुझने के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मृतकों के परिजनों को भी हादसे की सूचना दे दी है।
फिलहाल पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं तेज रफ्तार, नींद या तकनीकी खराबी तो इस हादसे की वजह नहीं बनी।

बांगो थाना क्षेत्र का यह इलाका लंबे समय से सड़क हादसों के लिए बदनाम हो चुका है। यहां आए दिन गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं और कई बार जानलेवा साबित हो रही हैं।यह मार्ग अभी भी टू-लेन है, जबकि इसी रास्ते से छत्तीसगढ़ के साथ-साथ झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाला भारी यातायात गुजरता है। वाहनों का दबाव ज्यादा होने के साथ यह हाईवे जंगल और पहाड़ी इलाकों से होकर निकलता है। जगह-जगह घुमावदार मोड़, तीखे ढलान और गहरी घाटियां हैं, जहां जरा सी चूक बड़े हादसे में बदल जाती है।

प्रशासन और पुलिस ने इस मार्ग पर मदनपुर घाटी, केंदई हसदेव पुल, मोरगा बस स्टैंड, मड़ई घाट, गुरसिया चौक और लमना घाट इन छह स्थानों को ब्लैक स्पॉट घोषित किया है। इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक मदनपुर घाटी का करीब 500 मीटर का हिस्सा माना जाता है, जहां घुमावदार मोड़ के साथ सड़क के नीचे 25 से 40 फीट तक गहरी खाई है।

हादसे रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, लेकिन जंगल-पहाड़ का क्षेत्र होने और रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों की वजह से चालक मोड़ों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। नतीजा यह होता है कि पलक झपकते ही वाहन संतुलन खो बैठते हैं और सीधे खाई में जा गिरते हैं।

 


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