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अवैध खनन पर रिपोर्टिंग के बाद घेराबंदी, पत्रकार पर हमला, फिर ब्लैकमेलिंग की रिपोर्ट लिखाई
15-Jan-2026 12:05 PM
अवैध खनन पर रिपोर्टिंग के बाद घेराबंदी, पत्रकार पर हमला, फिर ब्लैकमेलिंग की रिपोर्ट लिखाई

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 15 जनवरी। पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील अमरकंटक- मैकल क्षेत्र से अवैध खनन व क्रशर संचालन की रिपोर्टिंग कर लौट रहे पत्रकार सुशांत गौतम की कार को  रोककर हमला किया गया, जिससे उनकी गाड़ी का शीशा टूट गया और चोट भी आई। पत्रकार द्वारा गौरेला थाने में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने के कुछ घंटे बाद आरोपियों की ओर से भी ब्लैकमेलिंग की एफआईआर दर्ज कराई गई है।

पत्रकार सुशांत गौतम ने 9 जनवरी की सुबह पुलिस एफआईआर दर्ज कराते हुए बताया कि 8 जनवरी 2026 की शाम वे अपने सहयोगी रितेश गुप्ता के साथ मैकल पर्वत श्रृंखला क्षेत्र में पर्यावरण और खनन से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग कर लौट रहे थे। धनौली गांव के पास उनकी गाड़ी को योजनाबद्ध तरीके से घेर लिया गया। आगे एक सफेद कार, बगल में एक हाईवा और पीछे से एक अन्य चारपहिया वाहन लगाकर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया।

शिकायत के अनुसार, इस दौरान जयप्रकाश शिवदासानी, लल्लन तिवारी और सुनील बाली अपने ड्राइवरों, मजदूरों और अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियों के बीच लोहे की रॉड से ड्राइवर साइड के कांच पर वार किया गया, जिससे कांच टूट गया और पत्रकार के चेहरे व माथे पर चोटें आईं। इसी दौरान उनके साथी का मोबाइल फोन छीनकर बंद कर देने और संपर्क बाधित करने का भी आरोप है।

घटना के बाद पत्रकार ने मेडिकल परीक्षण कराते हुए थाना में औपचारिक शिकायत दी, जिसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया। एफआईआर में रास्ता रोकने, घातक हथियार से हमला करने, वाहन क्षति, मोबाइल लूटने और जान से मारने की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले को संज्ञेय मानते हुए विवेचना शुरू कर दी है।

उसी दिन दोपहर में एक दूसरी एफआईआर भी दर्ज कराई गई। इस काउंटर शिकायत में जयप्रकाश शिवदासानी ने आरोप लगाया कि सुशांत गौतम और उनके सहयोगी रितेश गुप्ता ने स्वयं को पत्रकार बताकर अवैध वसूली की। शिकायत के मुताबिक सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के जरिए दबाव बनाया गया, पहले एक लाख रुपये की मांग की गई और बाद में धमकी देकर पैसे वसूलने की कोशिश हुई। उन्होंने 10 हजार रुपये भी दिए, ताकि विवाद समाप्त हो जाए। काउंटर एफआईआर में वाहन से कुचलने की कोशिश और जानलेवा हमला करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इस शिकायत पर भी अलग धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

मालूम हो कि अमरकंटक–मैकल बायोस्फियर रिजर्व का अहम हिस्सा माना जाता है। वन विभाग की रिपोर्ट में पमरा क्षेत्र में संचालित स्टोन क्रशरों द्वारा पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और वन सीमा के बेहद करीब उत्खनन के सवाल उठाए गए हैं। नियमों के अनुसार क्रशर संचालन में न्यूनतम दूरी 250 मीटर तय है, जिसके उल्लंघन की बात रिपोर्ट में कही गई है। पुलिस दोनों पक्षों की एफआईआर पर जांच कर रही है।  


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