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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 14 अक्टूबर। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार-अनाचार के अपराधों पर चर्चा के लिए राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने बुधवार को गृह विभाग की बैठक रखी थी, लेकिन गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के क्वॉरंटीन होने की सूचना पर बैठक स्थगित कर दी गई। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महिलाओं के खिलाफ घटित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई, इस बैठक में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि महिलाओं के खिलाफ घटित मामलों की जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्यपाल सुश्री उइके द्वारा बुधवार को राजभवन में ली जाने वाली गृहविभाग की समीक्षा बैठक स्थगित कर दी गई है। राजभवन की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि चूंकि गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के क्वॉरंटीन होने की सूचना प्राप्त हुई है। बैठक उनकी उपस्थिति ही आयोजित की जानी थी। इन कारणों से उक्त बैठक स्थगित की गई है। श्री साहू के क्वॉरंटीन अवधि समाप्त होने के बाद यह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री निवास में हुई गृहविभाग की बैठक में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू शामिल हुए। बैठक में मुख्यमंत्री ने महिलाओं के खिलाफ प्रकरणों की बारीक समीक्षा की। उन्होंने डीजीपी को निर्देश दिए कि महिला अपराधों की रोकथाम के लिए एसओपी बनाई जाए और पुलिस मुख्यालय सीधे महिलाओं के विरूद्ध गंभीर अपराधों की समीक्षा करे। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में इन अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष जांच दल का गठन भी किया जाए। डीजीपी अवस्थी ने बैठक में बताया कि राज्य में महिलाओं पर घटित कुल अपराधों में वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में कमी आई है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए प्रारंभ किए जा रहे ‘समर्पण अभियान’ के लिए बैठक में सहमति प्रदान की। डीजीपी श्री अवस्थी ने इस अभियान के संबंध में बताया कि ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो अकेले रहते हैं, उन्हें इस अभियान से जोड़ा जाएगा। कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को कोरोना काल में महामारी से सुरक्षा हेतु आवश्यक सुविधाएं, उनकी समस्याओं के त्वरित निदान सहित उन्हें आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध कराने का कार्य किया जाएगा। इस अभियान से जोडऩे के लिए वरिष्ठ नागरिक थाने में आवेदन देकर या पुलिस मुख्यालय से जारी वाट्सएप नंबर तथा ई-मेल एड्रेस पर आवेदन देकर समर्पण सदस्यता प्राप्त कर सकेंगे। प्रथम चरण में यह अभियान रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में शुरू किया जाएगा।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि एकीकृत इमरजेंसी रिस्पोन्स सिस्टम डायल 112 के तहत पुलिस सहायता, अग्नि शमन, मेडिकल इमरजेंसी, महिला सहायता, स्मार्ट सिटी सर्विलेंस की सुविधाएं 11 जिलों में दी जा रही हैं। इस सेवा के तहत लगभग दो साल में 53 लाख कॉल प्राप्त हुए। इनमें से साढ़े नौ लाख लोगों को पुलिस सहायता दी गई, लगभग साढ़े चार लाख लोगों को अपातकालीन चिकित्सा सेवा, आठ हजार लोगों को अग्नि शमन सेवा, दो लाख सडक़ दुर्घटना के मामलों में सहायता उपलब्ध कराई गई। संकट में फंसे छह हजार बच्चों को बचाया गया। आत्महत्या के 14 हजार प्रयासों को रोका गया, 72 हजार महिलाओं को सहायता दी गई। शहरी क्षेत्रों में कॉल आने के औसतन 16 मिनट के अंदर और ग्रामीण क्षेत्रों में 28 मिनट के अंतर्गत जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध कराई गई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह सुब्रत साहू, संचालक लोक अभियोजन प्रदीप गुप्ता, रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. आनंद छाबड़ा, उप पुलिस महानिरीक्षक सुशील द्विवेदी, मुख्यमंत्री सचिवालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


