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कश्मीर, 12 अक्टूबर | भारत प्रशासित कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर एक बयान दिया है, जिस पर विवाद हो गया है.
उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ गतिरोध के लिए धारा 370 हटाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को ज़िम्मेदार ठहराया है. साथ ही उम्मीद जताई कि चीन की कोशिशों से 370 फिर से बहाल होगी.
उन्होंने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''हमने 370 हटाने को कभी स्वीकार नहीं किया है. जो इन्होंने पाँच अगस्त को किया है, वो यहाँ कबूल करने के लिए कोई तैयार नहीं है.''
चीन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ''वो लद्दाख में जो कुछ भी कर रहे हैं, वो अनुच्छेद 370 हटाने के कारण है, जिसे उन्होंने कभी स्वीकर नहीं किया है. अल्लाह करे कि उनके इस ज़ोर से हमारे लोगों को मदद मिले और 370 और 35ए जम्मू-कश्मीर में बहाल हो.''
नेशनल कॉन्फ़्रैंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने आगे कहा, "मैंने कभी चीन के राष्ट्रपति को यहाँ नहीं बुलाया. हमारे प्रधानमंत्री ने उन्हें गुजरात में बुलाया, उन्हें झूला भी झुलाया. वो उन्हें चेन्नई भी ले गए और उनके साथ खाना खाया. लेकिन, उन्हें ये पसंद नहीं आया और उन्होंने 370 को लेकर ये कहा कि हमें ये कबूल नहीं है. जब तक आप अनुच्छेद 370 को बहाल नहीं करेंगे तब तक हम रुकने वाले नहीं हैं.''
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें संसद में जम्मू-कश्मीर की समस्याओं पर बोलने की भी अनुमति नहीं है.
सोशल मीडिया पर चर्चा
फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के इस बयान की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है और कई लोग उन पर देशद्रोह का आरोप लगा रहा हैं.
बीजेपी नेता संबित पात्रा ने उनके बयान को लिखते हुए ट्वीट किया है, "अपने ही देश में कुछ लोग ये कहते हैं."
This is what some in Our own Country have to say..
— Sambit Patra (@sambitswaraj) October 12, 2020
Hope Article 370 will be restored in J&K with China's support: Farooq Abdullah https://t.co/Y8UUSTetGq
एक यूज़र गिरीश देसाई लिखते हैं, "फ़ारूक़ अब्दुल्लाह को तुरंत गिरफ़्तार करना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए. आपने कश्मीर में सभी फ़ायदे लिए, लोगों से उनके मूलभूत अधिकार छीने और अब आप चीन की मदद लेना चाहते हैं?"
यूज़र संकल्प काक ने ट्वीट किया है, "किसी भी देश में इसे देशद्रोह ही कहा जाएगा. इन्होंने पहले कश्मीरी हिंदुओं को धोखा दिया और ये उनके नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार हैं. अब ये सभी के लिए ऐसा चाहते हैं."
यूज़र विशाल रघुनाथ ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए लिखा है, "सर, हमारा अनुरोध है कि 370 के ख़िलाफ़ बयान को लेकर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए और वो अपनी सारी ज़िंदगी जेल में बिताएँ."
एक अन्य यूजर केसा ने फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के समर्थन में ट्वीट करते हुए लिखा, "फ़ारूक़ अब्दुल्लाह कश्मीर के लोगों की भावनाओं की बात कर रहे थे. भारत सरकार को अपनी ग़लती सुधारनी चाहिए, जो कश्मीर के लोगों को भारत सरकार और भारत के लोगों को क़रीब लाएगा."
भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया था. इसके बाद राज्य का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बाँट दिया था.
जम्मू-कश्मीर के बड़े राजनीतिक दल नेशनल कॉन्फ़्रेंस और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया था.
जम्मू-कश्मीर के कई बड़े नेताओं को लंबे समय तक नज़रबंद रखा गया. इनमें फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती भी शामिल थे.
उमर अब्दुल्लाह और फ़ारूक़ अब्दुल्लाह की तो नज़रबंदी ख़त्म कर दी गई है. लेकिन महबूबा मुफ़्ती अब भी नज़रबंद हैं.(BBCNEWS)


