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नई दिल्ली, 11 अक्टूबर | शहीद भगत सिंह सेवा दल में कार्यरत एक एंबुलेंस चालक की संक्रमण की चपेट में आ जाने से मौत हो गई। 55 वर्षीय मुहम्मद आरिफ खान की शनिवार को अस्पताल में मृत्यु हुई, वहीं मृतक आरिफ पिछले 30 सालों से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ एंबुलेंस चालक के रूप में काम कर रहे थे। हालांकि इस घटना के बाद से पूरे परिवार और संस्थान में हर किसी का रो रो कर बुरा हाल है। बीते 6 महीनों से मृतक आरिफ अपने घर भी नहीं गए थे क्योंकि उन्हें डर था कि उनकी वजह से किसी को संक्रमण न हो जाये। इस संस्थान के संस्थापक जितेंद्र सिंह शंटी ने आईएएनएस को बताया, पिछले 30 सालों से आरिफ मेरे साथ जुड़ा हुए थे वहीं पिछले 5 महीनों से अपने घर तक नहीं गए थे। सेवा दल की पाकिर्ंग में ही सोते थे ताकि परिवार को संक्रमण ना हो जाये।
उन्होंने बताया, हम अपने संस्थान की तरफ से आर्थिक मदद करेंगे, इसके लिए हम फंड इकट्ठा कर रहे हैं। हालांकि सरकार का फर्ज बनता है, कि वो आर्थिक मदद करे। आखिरकार वो एक कोरोना वॉरियर थे।
मुहम्मद आरिफ परिवार के साथ लोहा मंडी, वेलकम में किराये के मकान में रहते थे। आरिफ के कंधों पर ही परिवार का खर्च चलाने की जिम्मेदारी थी। परिवार में मुहम्मद आरिफ की पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं।
मोहम्मद आरिफ कोरोना संक्रमण की शुरूआत से ही संक्रमित लोगों को घर से अस्पताल पहुंचाने में जुटे हुए थे। वहीं संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों के शवों को अस्पताल से शमशान घाट पहुंचाने का काम करते थे।
दरअसल सेवा दल की तरफ से अब तक करीब 600 से अधिक कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाया गया है। इसके साथ ही करीब 450 शवों को अंतिम स्थान तक पहुंचाया गया।
-- आईएएनएस


