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गैंगरेप के आरोपियों को फांसी देने की उठी मांग, गांवों में बैठकों का दौर
10-Oct-2020 10:18 PM
 गैंगरेप के आरोपियों को फांसी देने की उठी मांग, गांवों में बैठकों का दौर

विश्रामपुरी, 10 अक्टूबर। गैंगरेप को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों की दिन भर बैठक चली।जहां उपस्थित ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग रखी है। बैठक में आसपास के कई गांव के लोग भी शामिल हुए। सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भी पीडि़त परिवार से मिलकर मामले की जानकारी ली है।

वहीं दुष्कर्म मामले को लेकर पीडि़ता के गांव एवं आसपास के गांव के ग्रामीणों की लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें लोगों का आरोपितों के प्रति आक्रोश बढ़ता दिख रहा है। बैठक में ग्रामीणों ने तय किया है कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए तथा आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी कि मामले को दबाने के लिए जिन्होंने प्रयास किया है उन जनप्रतिनिधियों एवं तत्कालीन थाना प्रभारी को भी आरोपितों की श्रेणी में रखा जाए तथा उनके खिलाफ भी उन्हीं धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए जो आरोपियों को लगा है। केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक के के ध्रुव ने भी मांग की है कि आरोपियों को बचाने एवं मामले को दबाने के लिए जिम्मेदार थाना तत्कालीन थाना प्रभारी पर भी मुकदमा दर्ज हो। पूर्व विधायक ने कहा कि इन दिनों गैंगरेप के मामले को लेकर केशकाल क्षेत्र के धनोरा थाना क्षेत्रांतर्गत गैंगरेप को लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। इस घटना से बस्तर की छवि को धक्का पहुंचा है।

कई ग्रामीणों ने सरपंच पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच पति के द्वारा आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस से सांठगांठ किया गया था। सरपंच पति को मामले की पूरी जानकारी थी उन्हें यह मालूम था कि खुदकुशी करने वाली लड़की के साथ गैंगरेप हुआ है किंतु उन्होंने पुलिस में शिकायत करने के बजाय उल्टे आरोपियों को बचाने के लिए आरोपियों से 10-10 हजार रुपए लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी को दिया था। जिसके पश्चात थाना प्रभारी एवं सरपंच पति ने मिलकर मामले को वही दबा दिया। 

पीडि़ता के चाचा के घर में बैठकों का दौर चलता रहा। जहां समाज के अलावा जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमें यह चर्चा होती रही कि इतनी बड़ी घटना को कुछ लोगों ने मिलकर दफन कर दिया।अनेक लोगों ने सरपंच पति के इस कृत्य का विरोध किया है तथा गांव में आक्रोश की स्थिति है। उपसरपंच शिवप्रसाद नाग गांव के पूर्व पटेल सुकलाल जायसवाल वीरसिंह आदि ने बताया कि सरपंच को मामले की पूरी जानकारी थी किंतु उन्होंने आरोपियों का बचाव किया तथा उसी के द्वारा पुलिस के साथ सांठगांठ किया गया था तथा लेनदेन करके मामले को दफना दिया गया। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने पर मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं। इन ग्रामीणों ने सरपंच पति के ऊपर भी कार्रवाई की मांग की है।

पीडि़ता के गांव के रामलाल मंडावी ने भी सरपंच पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि बीती रात लगभग 7 बजे सरपंच पति ने उनको धमकी दिया कि वह किसी को भी यह जाहिर ना होने दें कि उन्होंने ही मामले को रफा-दफा करने के लिए पुलिस से सांठगांठ किया था यदि वे ऐसा करेंगे तो इसका दुष्परिणाम उनको भुगतना पड़ेगा।रामलाल ने इसकी शिकायत पुलिस से भी की है इस समय जब गांव में ग्रामीणों की बैठक हो रही थी तो वहां थाना प्रभारी भी जांच के लिए पहुंचे थे। उनके समक्ष सरपंच के पति की शिकायत की गई।

सरपंच पति बसंत सिन्हा ने बताया कि मामले को वे आत्महत्या समझकर गांव में ही दफना दिए तथा इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी गई थी। उसके तीन चार दिन के बाद पता चला कि गैंगरेप होने के कारण उसने आत्महत्या की है। इस बीच घरवालों एवं ग्रामीणों ने मामले को आगे बढ़ाने से मना किया क्योंकि लाश की खुदाई एवं पोस्टमार्टम होगी जो गांव वाले को एवं घर वालों को ठीक नहीं लगेगा। बाद में तत्कालीन थाना प्रभारी रमेश शोरी ने आरोपियों को बुलाया था। तत्पश्चात मामले को रफादफा कर दिया गया।

 


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