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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 8 अक्टूबर। यौन शोषण कानून के तहत अपनी मातहत एक महिला सिपाही के लगाए गए आरोप झेल रहे प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एडीजी पवन देव को 2018 में जारी की गई एक चार्जशीट जबलपुर स्थित कैट ने खारिज कर दी है। लेकिन अपने आदेश में कैट ने यह लिखा है कि पवन देव पर लगे आरोपों की जांच के लिए बनी कमेटी ने 2 दिसंबर 2016 को जो रिपोर्ट दाखिल की थी, उस पर पुलिस मुख्यालय और गृहविभाग आगे कार्रवाई कर सकता है।
यह मामला 2016 का है जब एक महिला सिपाही ने पवन देव पर यौन शोषण कानून के तहत आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाया था। उसकी शिकायत थी कि पवन देव ने उससे टेलीफोन पर अश्लील बातें कीं, और तरह-तरह से उसे परेशान किया। इस पर शासन ने प्रदेश की वरिष्ठतम महिला आईएएस, रेणु पिल्ले की अध्यक्षता में एक आंतरिक जांच समिति बनाई थी जिसने अपनी रिपोर्ट 2 दिसंबर 2016 को दाखिल कर दी थी। इसके लंबे समय बाद पवन देव को चार्जशीट जारी की गई जिसके खिलाफ उन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, जबलपुर में अपील की थी। वहां से अभी 5 अक्टूबर को यह फैसला आया है जिसमें पवन देव को जारी चार्जशीट को इस आधार पर खारिज किया गया है कि जब शासन ने ऐसी जांच कमेटी बनाई थी, और उस कमेटी ने पूरे मामले को विस्तार से समझकर उस पर आखिरी रिपोर्ट दाखिल की थी, तो शासन को उस रिपोर्ट पर ही 2013 के कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी थी, और पवन देव को किसी तरह की चार्जशीट जारी करने की कोई वजह नहीं थी। जब आंतरिक शिकायत कमेटी की पूरी जांच हो चुकी थी, उसके डेढ़ बरस बाद चार्जशीट जारी करना कामकाज की जगह पर यौन शोषण के खिलाफ बनाए गए 2013 के कानून के खिलाफ था। चार्जशीट की जगह शासन को सीधे इस जांच-रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करनी थी।
यह फैसला पवन देव को जारी की गई चार्जशीट को तो खारिज कर रहा है, लेकिन स्पष्ट रूप से यह भी बता रहा है कि शासन को (रेणु पिल्ले) जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करनी थी।
उल्लेखनीय है कि यह मामला हाईकोर्ट, राष्ट्रीय महिला आयोग, और कई दूसरी जगहों पर बरसों से चले आ रहा है, और अब तक शिकायतकर्ता महिला सिपाही की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है जबकि जांच-रिपोर्ट 2016 से सरकार के पास पड़ी हुई है।


