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इस शरद पूर्णिमा पर जड़ी-बूटीयुक्त खीर नहीं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 8 अक्टूबर। वैश्विक महामारी कोरोना के असर से धार्मिक और परंपरागत आयोजन सीमित हो गए हैं। शरद पूर्णिमा पर करीब 21 वर्षों से स्थानीय बर्फानी आश्रम स्थित मां पाताल भैरवी मंदिर परिसर में श्वांस, दमा व अस्थमा पीडि़तों को नि:शुल्क जड़ी-बूटीयुक्त खीर प्रसाद का वितरण होता रहा है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते आगामी 30 अक्टूबर को शरण पूर्णिमा महोत्सव पर खीर प्रसादी का वितरण नहीं किया जाएगा।
हर साल शरद पूर्णिमा के अवसर पर हजारों लोग जड़ी बूटीयुक्त खीर के लिए जिले समेत प्रदेश के अन्य जिलों से लोग प्रसादी लेने पहुंचते रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 25 से 30 हजार भक्त खीर का सेवन करने प्रत्येक वर्ष मंदिर परिसर पहुंचते हैं।
संस्था के सचिव गणेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा पिछले 21 वर्षों से पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्वांस, दमा व अस्थमा पीडि़तों को नि:शुल्क जड़ी-बूटीयुक्त खीर प्रसाद का वितरण बर्फानी आश्रम स्थित मां पाताल भैरवी मंदिर परिसर में आयोजित किया जाता था। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के अलावा अंचल के लोग हजारों की तादाद में आते हैं। इस वर्ष संस्था ने निर्णय लिया है कि 30 अक्टूबर को पडऩे वाली शरद पूर्णिमा के अवसर पर शहर के साथ ही देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण को देखते यह आयोजन लोगों को सुरक्षित रखने और शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार संस्था के पदाधिकारियों व सदस्यों ने ऑनलाइन चर्चा कर इस वर्ष शरद पूर्णिमा का आयोजन नहीं करने की सहमति दी। बताया गया कि संस्था अध्यक्ष राजेश मारू, उपाध्यक्ष दीपक जोशी, सचिव गणेशप्रसाद शर्मा, कोषाध्यक्ष नीलम जैन, महंत गोविंद दास, महेन्द्र लुनिया, कुलबीर छाबड़ा, बलविंदर सिंह भाटिया, मनीष परमार, संजय खंडेलवाल, दामोदर अग्रवाल समेत अन्य सदस्यों ने एक मत से कहा कि जनमानस को सुरक्षित रखने यह कदम उठाया जाना उचित होगा, क्योंकि 30 हजार से अधिक पीडि़ातें का इसमें समावेश रहता है। यह वायरस श्वांस, दमा और अस्थमा वालों को ज्यादा प्रभावित कर सकता है। इस कारण इस बार यह आयोजन नहीं किया जाएगा।


