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बेमेतरा में 200 एकड़ जमीन हथियाने की साजिश से राजगामी संपदा हड़बड़ाया
08-Oct-2020 1:45 PM
बेमेतरा में 200 एकड़ जमीन हथियाने की साजिश से राजगामी संपदा हड़बड़ाया

कृषि कॉलेज की आड़ में रियासत की जमीन कब्जाने की चाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 8 अक्टूबर।
राजनांदगांव की रियासतकालीन बेशकीमती संपत्ति में से बेमेतरा में 200 एकड़ जमीन को हथियाने का एक बड़ा खेल चल रहा है। कृषि कॉलेज खोलने की आड़ में सत्ता से जुड़े प्रभावशाली नेता के द्वारा राजगामी संपदा के ऊपर राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव के जरिये खेतीयुक्त जमीन को कृषि महकमे को सुपुर्द किए जाने का षडय़ंत्र किया जा रहा है। इस जमीन से राजगामी संपदा को सालाना अच्छी कमाई होती है। इस मुनाफे को स्थापना व्यय में उपयोग किया जाता है।

बताया गया है कि बेमेतरा के बेलगांव में राजगामी संपदा की करीब 500 एकड़ खेती भूमि है। इस भूमि को नया हार्टिकल्चर कॉलेज खोलने के लिए शासन स्तर से राजगामी संपदा को प्रस्ताव भेजा गया है। बताया जा रहा है कि 200 एकड़ की जिस भूमि की मांग की जा रही है वह बेहद उपजाऊ है। वहीं अकेले इसी जमीन से राजगामी संपदा को हर साल 50 लाख रुपए लीज के एवज में मिलती है। कुल संपदा की सालाना कमाई करीब एक करोड़ रुपए है। जिसमें 60 प्रतिशत राशि स्थापना और दूसरे मदों में व्यय किया जाता है।

बताया जा रहा है कि उक्त जमीन को कृषि विभाग को सौंपने से सीधे राजगामी संपदा को 50 लाख रुपए का आर्थिक नुकसान होगा। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों के वेतन और दूसरे खर्च के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि राजगामी संपदा अध्यक्ष विवेक वासनिक ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रभारी मंत्री मो. अकबर को भी विस्तृत जानकारी दी है। एकमुश्त 200 एकड़ जमीन देने से राजगामी संपदा का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। गौरतलब है कि राजगामी संपदा के पास हजारों एकड़ जमीन है। इसके अलावा राजनांदगांव शहर का एक बड़ा हिस्सा संपदा के जमीन पर ही बसा हुआ है। 70-80 के दशक में भी राजगामी संपदा से  180 एकड़ जमीन कृषि कॉलेज खोलने के नाम पर ली गई। आज पर्यन्त इस जमीन के एवज में संपदा को आर्थिक मुआवजा और क्षतिपूर्ति नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि 200 एकड़ की जमीन फिर मांग किए जाने से मामला सुर्खियों में आ गया है। 
हार्टिकल्चर कॉलेज खोलने के लिए यूजीसी के मापदंड के तहत सिर्फ 50 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। जबकि कॉलेज के नाम पर 200 एकड़ जमीन सुपुर्द करने का प्रस्ताव राजगामी के सामने रखा गया है। 

बताया जा रहा है कि जमीन देने के प्रस्ताव पर मुहर लगने से राजगामी संपदा की सालाना कमाई 50 प्रतिशत तक आकर गिर जाएगी। जबकि संपदा के अधीन दर्जनों कर्मी कार्यरत हैं। बेमेतरा की जमीन पर पूरा गांव खेती कर रहा है। ऐसे में लीज में खेती कर रहे किसानों की दिक्कतें बढ़ेंगी। इस संबंध में राजगामी संपदा अध्यक्ष विवेक वासनिक ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि राजनांदगांव की जनता के हितों के मद्देनजर राजघराने ने राजगामी संपदा का गठन किया था। जिसमें राजनांदगांव के जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। 

किसी भी सूरत में वह जनता के साथ कुठाराघात नहीं होने देंगे। उधर जमीन को लेकर प्रभावशाली नेता द्वारा भारी उठापटक किया जा रहा है। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर जमीन को हथियाने की कोशिशें की जा रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में भी इसे लेकर अंदरूनी विरोध दिख रहा है। 

उधर राजगामी संपदा की जमीन को कब्जा करने का मामले से सियासी तूफान खड़ा हो गया है। पूर्व सांसद व जिला भाजपा अध्यक्ष मधुसूदन यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि जमीन दिए जाने का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। यह राजनंादगांव की जनता के साथ छल करने का प्रयास है। राजनीतिक और गैर राजनीतिक मोर्चे से जमीन देने पर खुलकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास संपदा की जमीन को स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है। बहरहाल राजगामी संपदा पर संकट के बादल दिख रहे हैं। इस मामले से विवाद खड़ा हो गया है।


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