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नाबालिग गैंगरेप पीडि़ता ने लगाई थी फांसी, 2 माह बाद पिता की खुदकुशी की कोशिश से खुलासा, परिवार के सामने निकाला दफन शव
07-Oct-2020 9:19 PM
नाबालिग गैंगरेप पीडि़ता ने लगाई थी फांसी, 2 माह बाद पिता की खुदकुशी की कोशिश से  खुलासा, परिवार के सामने निकाला दफन शव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
विश्रामपुरी, 7 अक्टूबर।
कोंडागांव जिले के केशकाल विस के धनोरा थानान्तर्गत ग्राम में नाबालिग गैंगरेप पीडि़ता के दफन किए शव को करीब दो माह बाद आज मृतका के परिवार, गांव के वरिष्ठ ग्रामीणों व पुलिस की मौजूदगी में निकालकर धनोरा अस्पताल लाया गया। यहां से फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। 

ज्ञात हो कि दो माह पहले नाबालिग गैंगरेप पीडि़ता ने दुख-ग्लानि एवं लोक लज्जा से घर में फांसी लगाई थी। कार्रवाई नहीं होने से परेशान लडक़ी के पिता द्वारा जहर पीकर जान देने की कोशिश के बाद मामले का खुलासा हुआ।

इस संबंध में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि मामले की पूरी बारीकी से जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गैंगरेप पीडि़ता के फांसी लगा लेने की जानकारी मिलने पर उसकी सहेली ने परिवारजनों को बताया कि मामला करीब दो माह पहले का है। 

शादी में चलने वाले नाच गाना में कुछ लड़कियां शामिल होने गई थी। उन्हीं में से दो लडक़ी को कुछ मनचले लडक़ों ने पकड़ लिया, जिसमें से वह किसी तरह लडक़ों के चंगुल से बचकर भागने में सफल हो गई पर एक नाबालिग लडक़ी फंस गई। आरोपी 7 युवकों ने उसे शादी घर से जंगल की ओर ले गए। बारी-बारी से 7 युवकोंं ने उससे बलात्कार किया। अपने चंगुल से मुक्त करने के पहले उन युवकों ने पीडि़ता को अपने साथ हुए इस घटना की जानकारी और किसी को न देने की चेतावनी देते धमकी भी दी।                                

घर पहुंचने के बाद वह अपने माता-पिता एवं परिवार वालों को अपनी आपबीती बता पाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाई। वह अपने साथ घटित हुई घटना को लेकर दुख-ग्लानि एवं लोक लज्जा से घर में ही फांसी का फंदा बनाकर झूल गई। दूसरे दिन उसको परिवार एवं ग्रामीणों ने दफन कर दिया।                                 

मृतका के चाचा ने बताया कि घटना के दिन परिवार के सभी सदस्य खेत में काम करने गए थे। युवती छोटे बच्चों के साथ घर में थी। तभी दोपहर करीब 2 बजे बच्चों ने खेत आकर बताया कि दीदी ने फांसी लगा ली है। जिसके बाद तुरंत हम लोग घर पहुंचे, तथा उसको नीचे उतारा, तब तक वह जीवित थी। उसे अस्पताल ले जान के लिए गाड़ी की व्यवस्था कर रहे थे, तभी उसकी मौत हो गई। चूंकि युवती के माता-पिता गांव से बाहर थे, इसलिए अंतिम संस्कार नहीं किया गया था। 

अगले दिन सुबह 11 बजे सबकी मौजूदगी में शव को दफन किया गया। दफनाने के बाद गांव के कुछ युवकों से जानकारी मिली की  मृत युवती के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था।

लडक़ी की मृत्यु और उसके शव के कफन दफन के बाद दबी जुबान से उसके साथ घटित हुए हादसे की चर्चा होने लगी। घटना की खबर किसी तरह थाना तक पहुंच गया और थाने से तलब किया गया। लडक़ी के माता-पिता एवं परिवार के कुछ लोग थाना पहुंचे। जहां बाद में मामले की जांच-कार्रवाई होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया। जिसके बाद मृतका के माता-पिता व परिवार जन को पुलिसिया जांच कार्रवाई होने की उम्मीद बंध गई थी। पर 2 माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।                                   
इसी बीच लडक़ी के पिता ने जहर पीकर जान देने की कोशिश की। समय रहते परिवार वालों को पता लग गया और उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र धनोरा जिसके चलते उसकी जान तो बच गई पर वह अपना सुध-बुध खो बैठा था। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ।             

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, केशकाल अनुविभागीय पुलिस अधिकारी अमित पटेल व धनोरा पुलिस बल के साथ पीडि़त परिवार के घर पहुंचे। उसके बाद मृतक के परिवारजन, गांव के वरिष्ठ ग्रामीणों के साथ मृत नाबालिग युवती को दफनाए गये स्थल पहुंच शव निकालकर कार्रवाई शुरू की। 

पूर्व विधायक कृष्ण कुमार धु्रव ने भी मामले को गंभीर अपराध के श्रेणी में रखते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराकर पीडि़त परिवार को जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग की है। 

 


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