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लॉकडाउन के बीच चिकारा लिए ‘छत्तीसगढ़’ दफ्तर पहुंचा बुजुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुन्द, 27 सितम्बर। आज दोपहर करीब 12 बजे लॉकडाउन के बीच ‘छत्तीसगढ़’ कार्यालय में एक बुजुर्ग आया। उम्र लगभग 70 साल। हाथ में एक रोंझो बनाम चिकारा, दूसरे हाथ में लाठी और दाल-चावल की गठरी। दरवाजे पर बैठ, बिना इजाजत वह चिकारा बजा कर देवार गीत गाने लगा। कई बार पूछने के बाद अपना नाम धाकड़ देवार बताया। अभी उनका कुनबा शहर के श्रीराम टॉकीज के पास बसा हुआ है। पैदाइशी महासमुन्द का ही है। परिवार में बेटे-बहू हैं लेकिन सभी अपने में मगन हैं। धाकड़ हर रोज शहर की गलियों में जाता है और चिकारा बजाकर उसके एवज में मिले दाल चावल साथ लेकर लौटता है। इसी से जीवन चल रहा है।
कहता है.. हर कोई अब नहीं देता माई। जिसकी मरजी होती है, दे देते हैं। ज्यादा लोग भिखारी समझ दुत्कार देते हैं। बस इतना कहने के बाद वह फिर से गाने लगा..कोडार बांध का किस्सा वाला गाना...भलुआ नाचा ल बाम्हन नाचे..रूप बरन नहि जाय...। गाने के बाद उसने माचिस मांगी.. बीड़ी सुलगाकर दूसरे दरवाजे की ओर रुखसत हुआ। इस लॉकडाउन का चौथा दिन महासमुन्द के धाकड़ के लिए अन्य दिनों की तरह ही रहा।


