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-राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 25 सितम्बर। पिता की मौत की ख़बर सुनकर भी बेटा कोरोना महामारी के दौरान लगी पाबंदियों के चलते अमेरिका से घर नहीं पहुंच पाया। ऐसे में छोटी बहन ने पिता को कांधा दिया और रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया।
एक निजी कम्पनी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद से रिटायर्ड कल्पना विहार, नेहरू नगर निवासी महेन्द्र सिंह चौहान (73 वर्ष) का देहावसान हो गया। चौहान ने अपने बच्चों को अच्छी परवरिश और शिक्षा दीक्षा दी। बेटा रिशु और बड़ी बेटी शैली सिंह अमेरिका में जॉब करते हैं। उनकी छोटी बेटी ऋतु सिंह भी कम्प्यूटर इंजीनियर है और बेंगलूरु में अपने पति के साथ जॉब पर है। बिलासपुर में पिता की मौत की ख़बर इन बच्चों के पास पहुंची लेकिन अमेरिका से भारत के लिये हवाई सेवा बाधित होने के कारण वहां से बड़ी बेटी और बेटा नहीं पहुंच पाये।

बेंगलूरु से बेटी ऋतु सिंह हवाई सफर करके रायपुर फिर बिलासपुर अपने घर पहुंचीं। पिता का अंतिम संस्कार करना था और बेटा सात समुन्दर पार था। रिश्तेदारों व शुभचिंतकों से राय मिली कि ऋतु ही पिता को अंतिम विदाई देने की रस्म पूरी करे। ऋतु ने यह फर्ज निभाया। उनसे पिता को कांधा दिया और सरकंडा स्थित पं. देवकीनंदन श्मशान गृह में उन्हें मुखाग्नि दी।
स्व. चौहान अमलाई के एक प्राइवेट कम्पनी में जॉब करते थे और सेवानिवृत्त होने के बाद बिलासपुर आकर रहने लगे। उन्हें कैंसर भी हुआ था पर वे इससे छुटकारा पा चुके थे। वे बीते कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।


