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सरकार अपनी क्षमता भी बढ़ाए
रायपुर, 24 सितंबर। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा कोविड-19 संक्रमण के उपचार हेतु निजी अस्पतालों की अधिकतम दरें निर्धारित की गई हैं। हैरानी की बात है कि जो दरें तय की गई हैं, वे राज्य सरकार की अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना-डॉ खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना की पैकेज दरों से कई गुना ज़्यादा है। ये दरें रायपुर में बिल्डिंग में कोविड अस्पताल संचालन हेतु निविदा के माध्यम से अनुबंधित निजी संस्था के लिए तय दर से भी बहुत ज़्यादा हैं। जन स्वास्थ्य अभियान, छत्तीसगढ़ की ओर से यह मांग की गई है।
संस्था ने अपने प्रेस नोट में बताया है- छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज हेतु विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत निम्नासुनार दरें निर्धारित की गई हैं-

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए उपरोक्त आदेशों के बीच स्पष्ट विरोधाभास दिखाई दे रहा है। एक ही तरह के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में अलग अलग दरें निर्धारित की गई हैं। छत्तीसगढ़ में डीकेबीएसएसवाई/एबी-पीएमजेएवाई जिसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति जिसके पास राशन कार्ड हो (बी पी एल या ए पी एल ) इस योजना का लाभ उठाने के लिए योग्य है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत कोविड का उपचार देने के लिए सख्ती नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों को खुला छोड़ दिया गया है कि वे खुद तय कर सकते हैं कि उनको बीमा योजना के तहत मरीज़ का इलाज करना है या मरीजों से पैसा लेकर।
इससे जो मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हो रहे है उन्हें बहुत ज़्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर एक लक्षण-रहित कोविड मरीज अपने उपचार हेतु जनरल वार्ड में 10 दिन के लिए भर्ती होता है, तो उसे 62000 रु. का खर्चा उठाना पड़ेगा। और दवाई का पैसा अलग से देना पड़ेगा। जिस मरीज को ऑक्सीजन लगेगी, तो न्यूनतम 1 लाख रूपए खर्चा होगा और दवाईयों का खर्चा अलग से रहेगा। विभाग ने निर्धारित दर में दवाइयों को शामिल नहीं किया है और निजी अस्पताल दवायों के लिए मनमाना दाम लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
निजी अस्पताल में अपना उपचार कराने के लिए कोविड मरीज को औसत खर्चा लगभग 2 लाख रूपए के आस पास पड़ रहा है। आज, राज्य में लगभग 1500 से 2000 कोविड मरीजो का इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है।
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय की गई दरें अन्य कई राज्यों जैसे कि राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश एवं केरला से कहीं ज़्यादा हैं। राजस्थान में आईसीयू, वेंटीलेटर के बगैर, का प्रतिदिन दर 7500 रूपए है और इसमें दवाईयां, पीपीई किट, उपभोग्य वस्तुएं (कन्जुमेबल), और बाकी सभी चीजें शामिल है। अत: छत्तीसगढ़ की तुलना में राजस्थान में निजी अस्पतालों में मरीज का औसत खर्च लगभग आधा होगा।
दूसरी समस्या यह है कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के मौजूदा मानव संसाधन के बड़े हिस्से और कई सरकारी संस्थायों को कोविड के लिए उपयोग किया जा रहा है।
इस वजह से अन्य अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाएँ नजरअंदाज हो रही हैं। फलस्वरूप, यह खतरा है कि राज्य में टीबी, एचआईवी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, सिकल सेल इत्यादि के वजह से मौतें बढ़ सकती हैं। कई जिलों से मातृ एवं नवजात मृत्य में भी वृद्धि के संकेत मिलने शुरू हो चुके हैं।
जन स्वास्थ्य अभियान छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से मांग करता है कि वह शीघ्र ही शासकीय स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता बढ़ाएं ताकि राज्य के सभी लोगों कि स्वास्थ्य की आवश्यकताएँ पूरी की जा सकें। सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए-
छत्तीसगढ़ सरकार यह अनिवार्य करे कि निजी अस्पताल कोविड-19 का उपचार स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत प्रदान करेंगे ताकि सभी पात्र परिवारों (बीपीएल एवं एपीएल राशन कार्ड धारक) को कोविड संबंधित उपचार सेवाएँ नि:शुल्क मिलें।
जिन कोविड मरीजों के पास राशन कार्ड नहीं है, उनके इलाज के लिए दरें भी स्वास्थ्य बीमा योजना की दरों के बराबर निर्धारित की जाएँ।
शासकीय कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन सुविधा युक्त बेड की उपलब्धता बढ़ाई जाए और साथ ही मरीजों को अस्पताल पहुंचने के लिए नि:शुल्क यातायात मिले।
सरकार कोविड मरीजों के इलावा दूसरे मरीजों के उपचार के लिए भी सेवायें उपलब्ध कराए। स्वास्थ्य सेवायों के लिए नये मानव संसाधनों की जल्द नियुक्ति की जाए।


