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दो अक्टूबर को विशेष ग्रामसभा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 20 सितंबर। सरकार ओबीसी-सवर्ण आरक्षण पर रविवार को बड़ा फैसला लिया है। इस कड़ी में ओबीसी और सवर्ण आरक्षण के लिए पीडीएस के डाटा को आधार बनाया जाएगा। यह फैसला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंत्रियों से चर्चा के बाद लिया है। ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के लिए ग्राम सभाओं में राशन कार्ड का अनुमोदित कराया जाएगा। इसके लिए गांधी जयंती को विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया है।
हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने और कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के दिशा निर्देश के बाद सरकार ने फैसला लिया है। इसमें प्रदेश में ओबीसी और संवर्णों की जनसंख्या के लिए राशन कार्ड के डाटा के आधार पर सरकार दावा करेगी। बैठक के जानकारी देते हुए संसदीय कार्यमंत्री रविन्द्र चौबे ने बताया कि हाईकोर्ट ने डाटा उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे।
उन्होंने बताया कि राशन कार्ड में दर्ज इकाई के आधार पर राज्य सरकार ओबीसी और सवर्णों की संख्या बताएगी। दावा आपत्ति के बाद एप से भी जिनके राशन कार्ड नहीं जुड़े हैं वे भी अपना नाम जुड़वा सकते हैं। राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए पीडीएस सिस्टम के आंकड़ों को आधार बनाएगी। राज्य में पिछड़ा वर्ग के 31 लाख 52 हजार 329 परिवार के 1 करोड़ 18 लाख 26 हजार 464 सदस्य गरीबी रेखा के नीचे हैं जबकि 3 लाख 95 हज़ार 444 परिवार के 12 लाख 55 हजार 972 लोग गरीबी रेखा से ऊपर हैं। यानी ओबीसी की करीब 88 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। चूंकि राज्य में करीब 99 फीसदी राशन कार्ड केंद्र सरकार के आधार से जुड़े हैं। ये आंकड़े प्रामाणिता को पुख्ता बनाएगे।
इसी साल छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने के बाद 15 अगस्त 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समूचे आरक्षण को 58 फीसदी से बढ़ाकर 82 फीसदी करने की घोषणा की थी। इस पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने 4 सितबंर 2019 को अध्यादेश लाकर इस फैसले को लागू कर दिया। इस फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी और 27 फरवरी 2020 को राज्य सरकार के अध्यादेश को रद्द कर दिया। इस अध्यादेश के रद्द होने के साथ ही राज्य में एससी और आर्थिक रुप से कमजोर तबके का बढ़ा हुआ आरक्षण भी रद्द हो गया।


