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पीडब्ल्यूडी में 15 सीनियर, जूनियर को प्रभार देने के कारण कम महत्वपूर्ण पदों पर...
26-Aug-2020 5:48 PM
पीडब्ल्यूडी में 15 सीनियर, जूनियर को प्रभार देने के कारण कम महत्वपूर्ण पदों पर...

सत्ता और विपक्ष के बीच नोंक-झोंक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 26 अगस्त।
पीडब्ल्यूडी में उच्च पद पर जूनियर अफसरों की पदस्थापना को लेकर बुधवार को विधानसभा में काफी नोंक-झोंक हुई। पीडब्ल्यूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने माना कि 15 सीनियर अफसर, जूनियर को प्रभार देने के कारण कम महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के पूरक सवाल के जवाब में श्री साहू ने कहा कि डेढ़ साल पहले डीपीसी करवा दिए होते और सबका प्रमोशन कर दिए होते, तो यह स्थिति नहीं आती। 15 साल आपको दिया गया था। आपने क्या किया? 

प्रश्नकाल में धरमलाल कौशिक ने पीडब्ल्यूडी में जूनियर अफसरों को अहम पद देने और सीनियर अफसरों को दरकिनार करने पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष के सवाल के जवाब में कहा कि सरकार सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का अक्षरश: पालन कर रही है। वरिष्ठता सहयोग्यता के आधार पर उनको प्रभार दिया जाता है। 

पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि वरिष्ठता एक अलग क्रम है जैसे वहां पर किसी को तत्काल प्रभार देना है। किसी का ट्रांसफर हुआ है, किसी की पोस्टिंग हुई है, तो वहां उनकी योग्यता सीनियर अफसर तय करते हैं कि इनके कामकाज कैसे रहे हैं। उस योग्यता के आधार पर चालू प्रभार दिया जाता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान में पीडब्ल्यूडी के  ईएनसी विजय भतप्रहरी को बिठाया गया है, उसकी जगह वरिष्ठता क्रम में कोई और अफसर है। 

पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि वरिष्ठता क्रम आपके जमाने से बना हुआ है, वह अगल है। बीच-बीच में आवेदन आते हैं, उसके अनुसार जांच होती है और वरिष्ठता क्रम बदलते गया है। वर्ष-2012-2018 में  डीके प्रधान को ईएनसी बनाया गया। उस वक्त पांचवें क्रम में थे। उस समय डीके अग्रवाल दूसरे क्रम में और विजय भतप्रहरी चौथे क्रम में थे। उसके बाद आवेदन आया फिर जांच हुई। श्री अग्रवाल प्रथम क्रम में हैं और उन्हें बनाया गया। 

भतप्रहरी का आवेदन आया था। उसकी जांच चल रही है। पीडब्ल्यूडी में डीके अग्रवाल के बाद केके पिपरी हैं। उसके बाद विजय भतप्रहरी, और फिर श्री कोरी हैं। सबको अलग-अलग बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।  नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि पिपरी और अग्रवाल के खिलाफ कोई जांच चल रही थी क्या जिसके कारण भतप्रहरी को श्रेष्ठ पाए गए? और उन्हें ईएनसी बनाया गया। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि ईएनसी का पद की योग्यता और कार्यक्षमता के अनुसार होता है। नेता प्रतिपक्ष ने चार अफसरों सुंदरलाल मरकाम, जेपी तिग्गा, एके श्रीवास और विकास श्रीवास्तव को लेकर जानकारी चाही। 

उन्होंने कहा कि क्या इनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित है और जांच चल रहा है? जांच चलते हुए भी इन्हें श्रेष्ठ पाया गया और प्रभार दे दिया गया? विभागीय जांच के बावजूद प्रभार दे दिया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, तो उसे प्रभारी नहीं बनाया जा सकता। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि मरकाम के खिलाफ विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। अधीक्षण अभियंता सेतु मंडल का पद खाली था इसलिए उन्हें प्रभार दे दिया गया।
 
उन्होंने जेपी तिग्गा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया था किन्तु विभागीय जांच संस्थित नहीं हुआ। उन्हें अंबिकापुर मंडल का पद खाली होने पर दे दिया गया। विकास श्रीवास्तव के खिलाफ आरोप पत्र जारी हुआ है किन्तु विभागीय जांच संस्थित नहीं हुआ है। इसलिए उन्हें सुकमा संभाग का रिक्त पद का प्रभार दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। पहली बार एक साथ 8 सीई के पद पर पदोन्नति हुई है। 


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