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एफआईआर रद्द करने का आदेश
बिलासपुर, 2 जुलाई('छत्तीसगढ़' संवाददाता)। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मल्लिका बल की गिरफ्तारी को लेकर सख़्त रवैया अपनाया है। पुलिस ने शीर्ष अधिकारियों ने अपनी गलती के लिये हाईकोर्ट से माफी मांगी है।
हाईकोर्ट ने बल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश भी दिया है। सन् 2014 में बल के ख़िलाफ़ एक एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में कहा गया कि स्टेट बार काउंसिल चुनाव में धांधली हुई है और चुनाव रद्द किया जाये। उस समय मल्लिका बल बार काउंसिल प्रभारी सचिव थी। कार्यालय के केयर टेकर ने बताया कि बल के साथ कुछ लोग रात में आये थे और ताला खोलकर प्रवेश किया। इस आधार पर पुलिस ने बल के खिलाफ अपराध दर्ज किया था।
हाईकोर्ट ने इस मामले में व्यवस्था दी थी कि इलेक्शन ट्रिब्यूनल जब तक कार्रवाई के नहीं कहता आरोपी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाये। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकायें दायर की गई, जहां याचिकाएं खारिज हो गई। सन 2019 में हाईकोर्ट ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप वाली याचिका खारिज कर दी।
इसी आधार पर अधिवक्ता भरत लूनिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को भी रद्द करने की मांग की। इस पर 12 जून 2020 को सुनवाई होनी थी। इसी दिन पुलिस ने मल्लिका बल को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई।
इस गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर आज सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने बल की गिरफ्तारी को लेकर गहरी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने डीजीपी डीएम अवस्थी, आईजी दीपांशु काबरा, पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल और सिविल लाइन थानेदार रहे परिवेश तिवारी को तलब किया था। सभी ने गिरफ्तारी को लेकर माफी मांगी। उनका कहना था कि महाअधिवक्ता कार्यालय से परामर्श के बाद उन्होंने गिरफ्तारी की कार्रवाई की थी।


