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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 14 जून। मुंगेली जिले के चर्चित पोखन यादव हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने हत्या के आरोप को संदेह से परे सिद्ध कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने अपनी बहन के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना का बदला लेने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से युवक की हत्या की थी। मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
अभियोजन के अनुसार 25 अक्टूबर 2023 को राजा साहू और दिलू साहू ने अपनी बहन के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर पोखन यादव और उसके परिवार को धमकी दी थी। उसी दिन जब पोखन यादव अपने ससुराल से लौट रहा था, तब आवासपारा स्थित एक शराब दुकान के पीछे कच्चे रास्ते में उसे घेर लिया गया।
आरोप है कि राजा साहू और दिलू साहू ने चाकू से गर्दन, सिर और माथे पर कई वार किए, जबकि दुर्गेश कुमार निगरानी करता रहा। गंभीर हमले में पोखन यादव की मौत हो गई। घटना के बाद तीनों आरोपी फरार हो गए थे, जिन्हें अगले दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
मामले की सुनवाई के बाद 23 जनवरी 2025 को मुंगेली सत्र न्यायालय ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों में तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गवाहों की विश्वसनीयता और बरामदगी पर सवाल उठाए, जबकि राज्य सरकार की ओर से धमकी, हथियारों की बरामदगी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध होने का दावा किया गया।
हाईकोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शी डोमराज यादव के बयान को भरोसेमंद मानते हुए कहा कि चिकित्सकीय और वैज्ञानिक साक्ष्य भी उसी की पुष्टि करते हैं। अदालत ने यह भी माना कि दुर्गेश साहू हत्या की साजिश का हिस्सा था और उसकी मंशा अन्य आरोपियों के समान थी।
इन तथ्यों के आधार पर खंडपीठ ने तीनों दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को यथावत रखा।


