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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा, 14 जून। फ्लाई ऐश के परिवहन में नियमों की अनदेखी करने पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने एनटीपीसी पर 1 लाख 20 हजार रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया है। जांच में पाया गया कि राख को निर्धारित मार्ग और स्थल तक पहुंचाने के बजाय बीच रास्ते में अन्य स्थानों पर उतार दिया गया था, जिससे प्रदूषण फैलने की आशंका बढ़ गई।
जानकारी के अनुसार एनटीपीसी ने अपने संयंत्र के साइलो से फ्लाई ऐश परिवहन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया है। निरीक्षण के दौरान वाहन क्रमांक सीजी 12 एआर 7717 की जांच की गई। पाया गया कि वाहन ने निर्धारित गंतव्य तक राख पहुंचाने के बजाय गोढ़ी स्थित गुरु नानक इंडस्ट्रीज परिसर में फ्लाई ऐश डंप कर दी।
इसी प्रकार वाहन क्रमांक सीजी 12 बीडी 9733 ने भी संयंत्र से फ्लाई ऐश लेकर दादर-ढेलवाडीह स्थित एक फ्लाई ऐश ईंट निर्माण इकाई में सामग्री उतार दी। जबकि दोनों वाहनों को दुर्ग-रायपुर बायपास मार्ग से निर्धारित स्थल तक राख पहुंचानी थी।
स्थानीय स्तर पर पहले भी सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर फ्लाई ऐश फेंके जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पर्यावरण संरक्षण मंडल का कहना है कि निर्धारित स्थल तक सामग्री नहीं पहुंचाने और परिवहन नियमों का पालन नहीं करने के कारण यह कार्रवाई की गई है।
मंडल ने एनटीपीसी परियोजना प्रमुख को निर्देश जारी कर कहा है कि फ्लाई ऐश का परिवहन पूरी तरह नियमों के अनुरूप कराया जाए। साथ ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से परिवहन की निगरानी सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
जानकारी के मुताबिक एनटीपीसी का धनरास में ऐश डैम मौजूद है, जहां फ्लाई ऐश पहुंचाई जानी चाहिए। लेकिन कई वाहन निर्धारित स्थल तक जाने के बजाय रास्ते में ही राख उतार देते हैं। इससे धूल और प्रदूषण की समस्या बढ़ती है।
कान के पास सांप ने डसा और चली गई छात्रा की जान
कोरबा, 14 जून। प्रगति नगर क्षेत्र में सांप के काटने से कक्षा तीसरी की एक छात्रा की मौत हो गई। शुरुआती समय में परिजनों ने इसे किसी कीड़े या चींटी के काटने की सामान्य घटना समझा, लेकिन कुछ ही घंटों में बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रगति नगर निवासी राकेश महतो की बेटी छात्रा वैष्णवी उर्फ सन्नू (11) शुक्रवार-शनिवार की रात वैष्णवी अपने कमरे में खाट पर सो रही थी। शनिवार तड़के करीब चार बजे वह अचानक जाग गई और परिजनों को बताया कि उसके कान के पास किसी चीज ने काट लिया है। बच्ची ने कमरे में मौजूद एक चूहे के बिल की ओर इशारा करते हुए वहां हलचल होने की बात भी कही।
परिजनों ने शुरुआत में इसे किसी कीड़े या चींटी के काटने की घटना मान लिया। लेकिन कुछ समय बाद उसके कान के पास सूजन आने लगी और वह बेचैन महसूस करने लगी। तब परिवार को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ।
बच्ची की हालत लगातार खराब होती देख उसके पिता को सांप के काटने की आशंका हुई। इसके बाद उसे तत्काल दर्री के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने स्थिति गंभीर बताते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।


