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कांग्रेस पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के ख़िलाफ़ दिल्ली में प्रदर्शन किया है और राष्ट्रपति भवन की ओर जाने की कोशिश की.
मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मीनाक्षी नटराजन के लिए इंसाफ़ की मांग की.
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा, “आप देख रहे हैं किसी तरह से बीजेपी ने देश में घोषित रूप से तानाशाही कर दी है. मीनाक्षी जी का अधिकार था, उनकी सुनवाई होनी चाहिए थी. उनका कोई अपराध नहीं है. उनका पर्चा स्वीकार होना चाहिए था. हम चुनाव आयोग के पास गए, वहां न्याय नहीं मिला. जब तक मीनाक्षी जी को न्याय नहीं मिलेगा, हम संघर्ष करते रहेंगे.”
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना था, इनमें दो सीटों पर बीजेपी की जीत निश्चित मानी जा रही थी, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में आती दिख रही थी.
लेकिन रिटर्निंग ऑफ़िसर से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया.
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बिना पर्याप्त क़ानूनी आधार के और राजनीतिक कारणों से रद्द किया गया. पार्टी का आरोप है कि रिटर्निंग अधिकारी का फ़ैसला मनमाना और पक्षपातपूर्ण था.
कांग्रेस ने इसकी शिकायत बुधवार को चुनाव आयोग से भी की थी. लेकिन आयोग से राहत नहीं मिलने पर मीनाक्षी नटराजन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसपर आज यानी शुक्रवार को सुनवाई हुई.
लाइव लॉ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस सदस्य मीनाक्षी नटराजन की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मध्य प्रदेश से उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने उन्हें 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत दायर चुनाव याचिका में इस मामले को उठाने की छूट दी.
लेकिन इससे पहले ही गुरुवार को मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीनों सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है. (bbc.com/hindi)


