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वेतनमान, नियमितीकरण और कर्मचारी दर्जे की मांगों के बीच बड़ा बयान
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 11 जून। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, नियमितीकरण, पेंशन और वेतनमान संबंधी मांगों के बीच केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री सिंह ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि उनकी नियुक्ति सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में की जाती है।
बुधवार को बिलासपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों में उनके पद के सामने सोशल वर्कर यानी सामाजिक कार्यकर्ता दर्ज होता है। नियुक्ति की शर्तों में भी यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित रहता है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है।
सावित्री ठाकुर ने कहा कि आंगनबाड़ी व्यवस्था लंबे समय से इसी स्वरूप में संचालित हो रही है। कार्यकर्ता और सहायिकाएं समाज सेवा की भावना से इस व्यवस्था का हिस्सा बनती हैं। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें उनके हित में लगातार वेतन और सुविधाओं का विस्तार कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के विलय से व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। साथ ही आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए पदोन्नति के अवसर भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा मातृत्व अवकाश सहित कई सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि मानदेय और अन्य वित्तीय विषयों में राज्य सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आंगनबाड़ी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए काम कर रही हैं।


