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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 10 जून। गांजा तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होने पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि नोटिस की विधिवत तामील होने के बावजूद राज्य की ओर से कोई पेश नहीं हुआ, जबकि मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था।
मंगलवार को न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ राज्य के स्थायी अधिवक्ता को इसकी जानकारी दी जाए। साथ ही मामले को अगली सुनवाई के लिए 12 जून 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
अभियोजन के अनुसार 14 सितंबर 2025 को शिवरीनारायण थाना प्रभारी को सूचना मिली थी कि एक कार में दो व्यक्ति गांजा की तस्करी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने वाहन क्रमांक सीजी 10 एफए 1143 को रोककर उसकी तलाशी ली।
तलाशी के दौरान कार की डिक्की से प्लास्टिक टेप में लिपटे 22 पैकेट बरामद किए गए। जांच में इनमें गांजा पाया गया। पुलिस ने मौके पर जब्त मादक पदार्थ का वजन कराया, प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से कुल 22.850 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत निर्धारित वाणिज्यिक मात्रा से अधिक है। इस मामले में बबलू साहू और अर्जुन चंद्राकर के खिलाफ मादक द्रव्य एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों आरोपी 14 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। आरोपियों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।


