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हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दोषी, 3 अगस्त को सुनवाई
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 10 जून। मस्तूरी थाना क्षेत्र के एक गांव में वर्ष 2017 में नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए दो आरोपियों को राहत नहीं मिली है। विशेष पॉक्सो न्यायालय द्वारा सुनाई गई 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है। अब दोनों दोषियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामले की सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
मामले में दोषी विपिन कुमार जांगड़े और सुनील कुर्रे को 19 फरवरी 2021 को बिलासपुर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी के तहत दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी।
31 जुलाई 2025 को न मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही माना। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि यौन अपराध की पीड़िता की गवाही को बिना ठोस कारण के खारिज नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हत्यारा केवल शरीर को नष्ट करता है, जबकि दुष्कर्मी पीड़िता की आत्मा को कुचल देता है। ऐसे जघन्य अपराधों में नरमी या सहानुभूति की कोई गुंजाइश नहीं है।
अभियोजन के अनुसार 18 नवंबर 2017 की रात नाबालिग छात्रा घर में शौच के लिए गई थी। इसी दौरान दोनों आरोपी दीवार फांदकर परिसर में घुस आए। आरोप है कि उन्होंने छात्रा का मुंह कपड़े से बांध दिया, उसके पैर बांधे और चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी देते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया।
काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजन मौके पर पहुंचे, जिससे आरोपी वहां से भाग निकले। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से चाकू और रूमाल सहित अन्य सामग्री जब्त की थी। एफएसएल रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और पीड़िता की विश्वसनीय गवाही के आधार पर अदालतों ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।
हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद दोनों दोषियों ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।


