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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 10 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेमेतरा जिले की एक भूमि से जुड़े विवाद में याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि संबंधित भूमि के रिकॉर्ड में पहले ही संशोधन किया जा चुका है और प्रशासन द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है। ऐसे में इस स्तर पर अंतरिम राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ता का दावा सही पाया जाता है, तो उसे नियमों के अनुसार भूमि का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान बेमेतरा जिले के निवासी धनेश कुमार की ओर से बताया गया कि उन्होंने ग्राम छुटापार, तहसील एवं विकासखंड नवागढ़ स्थित खसरा नंबर 109 के एक हिस्से की भूमि देवादास से क्रय कर विधिवत पंजीयन कराया था। याचिका में कहा गया कि 5 जून 2026 को प्रशासन ने उन्हें बेदखली वारंट जारी कर 8 जून तक भूमि खाली करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए एसडीएम (राजस्व), नवागढ़ के पास भेजा था, लेकिन अधिकारियों ने पुनर्विचार नहीं किया।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विवादित निर्माण को हटाकर आदेश का क्रियान्वयन पहले ही पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि गांव के वाजिब-उल-अर्ज अभिलेख में श्मशान भूमि के रूप में दर्ज है। इस संबंध में 23 जनवरी 2018 को एसडीएम (राजस्व) के समक्ष अपील दायर की गई थी, जिसके बाद रिकॉर्ड संशोधन का आदेश पारित हुआ था।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि उक्त भूमि को वाजिब-उल-अर्ज में दर्ज करने वाले मूल आदेश को भूमि के मूल मालिक देवादास ने राजस्व मंडल में चुनौती दी है, लेकिन वहां भी उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विवादित भूमि से संबंधित सभी अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की है।


