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नयी दिल्ली, 10 जून। कांग्रेस ने सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने के नरेन्द्र मोदी के रिकॉर्ड को लेकर बुधवार को दावा किया कि वह भारत पर एक बोझ की तरह हैं क्योंकि वह लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी भले ही पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रति "सनक" के चलते कोई खुद का तय मील का पत्थर हासिल कर रहे हों, लेकिन असल में वह पंडित नेहरू, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे महापुरुषों की उपलब्धियों को मिटाना चाहते हैं।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "15 अगस्त, 1947 को जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने एक ऐसी शानदार कैबिनेट की अगुवाई की, जैसी दुनिया में शायद ही कभी देखी गई हो। इसके अगले पांच वर्षों में आधुनिक भारत का निर्माण हुआ।"
उन्होंने कहा कि उस समय 560 से ज़्यादा रियासतों को शांतिपूर्ण ढंग से भारतीय संघ में मिलाया गया, भारत के संविधान पर चर्चा हुई और उसे अंगीकार किया गया, ज़मींदारी प्रथा खत्म की गई, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण लागू किया गया, कई बहुउद्देशीय सिंचाई और बिजली परियोजनाएँ शुरू की गईं, विज्ञान और तकनीक (जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल है) के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार किया गया और भारत वैश्विक मामलों में एक ताकत के रूप में उभरा।
रमेश का कहना है, "उसी दौर में सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए 17 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाली मतदाता सूची तैयार की गई और आज़ाद भारत के पहले आम चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 के बीच हुए।"
उन्होंने कहा, "1947-52 के दौरान नेहरू के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत की उपलब्धियों को अब प्रधानमंत्री मोदी मिटाना चाहते हैं, जिसमें सरदार पटेल, डॉ. आंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे दिग्गजों ने अहम भूमिका निभाई थी।"
कांग्रेस नेता ने दावा किया, "प्रधानमंत्री मोदी को नेहरू को लेकर एक तरह का जुनून या सनक है। हो सकता है कि उन्होंने आज खुद से तय किया हुआ और संदिग्ध तरीके से बनाया गया कोई मील का पत्थर हासिल कर लिया हो, लेकिन वह भारत के ऊपर एक बोझ की तरह हैं, क्योंकि वह भारत में लोकतंत्र की हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं।"
रमेश ने कहा कि लोकतंत्र के संस्थान... एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग और एक शुद्ध मतदाता सूची अब खतरे में हैं।
उन्होंने दावा किया, "हमारे शिक्षण संस्थानों को बर्बाद करके वैज्ञानिक सोच को खत्म कर दिया गया है, जैसा कि हाल ही में नीट-सीबीएसई घोटालों से पता चला है। निजीकरण और 'उपयुक्त नहीं पाया गया' (नॉट फाउंड सूटेबल) जैसे गलत तरीकों से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण को कमज़ोर किया गया है।"
उनका कहना है कि नेहरू 1952, 1957 और 1962 में भारी बहुमत से जीते थे, वहीं नरेन्द्र मोदी 2024 में साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर पाए और उन्हें खुद को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा संसदीय दल को दरकिनार करके जल्दबाजी में राजग की बैठक बुलानी पड़ी।
रमेश ने यह भी कहा कि 2024 का जनादेश निश्चित रूप से उनके लिए नहीं था।
उल्लेखनीय है कि मोदी ने 10 जून को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए और निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। (भाषा)


