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बिलासपुर एयरपोर्ट के 4सी श्रेणी में उन्नयन होने का पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों को मिलेगा लाभ
08-Jun-2026 12:19 PM
बिलासपुर एयरपोर्ट के 4सी श्रेणी में उन्नयन होने का पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों को मिलेगा लाभ

मांग को लेकर जन संघर्ष समिति का धरना जारी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 8 जून। बिलासपुर तक हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति बिलासपुर एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी में विकसित करने की मांग लगातार उठा रही है। रविवार को राघवेंद्र राव सभा भवन परिसर में धरने पर बैठे वक्ताओं ने कहा कि विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले छत्तीसगढ़ में वर्तमान में केवल रायपुर में ही 4सी श्रेणी का हवाई अड्डा है, जबकि राज्य के संतुलित विकास के लिए उत्तर छत्तीसगढ़ में भी ऐसी सुविधा आवश्यक है।

समिति के अनुसार कोंटा से रामानुजगंज तक फैले लगभग एक हजार किलोमीटर लंबे राज्य में बड़े विमानों के संचालन की सुविधा केवल रायपुर में उपलब्ध है। 4सी श्रेणी के एयरपोर्ट पर बोइंग और एयरबस जैसे बड़े विमान उतर सकते हैं। इन विमानों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण प्रति यात्री ईंधन खर्च कम पड़ता है, जिससे हवाई किराया भी अपेक्षाकृत सस्ता होता है।

समिति ने कहा कि वर्तमान में बिलासपुर से संचालित एटीआर विमान अधिकतम 72 यात्रियों को ले जा सकते हैं, जबकि बोइंग और एयरबस विमानों में सामान्यतः 180 या उससे अधिक यात्रियों की क्षमता होती है। इससे एयरलाइंस कम संसाधनों और कर्मचारियों के साथ अधिक यात्रियों को सेवा दे सकती हैं, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को कम किराए और बेहतर कनेक्टिविटी के रूप में मिलेगा।

समिति का दावा है कि यदि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी में उन्नत किया जाता है तो यह उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख हवाई केंद्र बन सकता है। मुंगेली और जांजगीर की दूरी लगभग 54 किलोमीटर रह जाएगी, जबकि कोरबा और सक्ती भी 100 किलोमीटर से कम दूरी पर होंगे। इसके अलावा बलौदाबाजार और बेमेतरा जैसे जिले भी रायपुर की तुलना में बिलासपुर एयरपोर्ट के अधिक निकट पड़ेंगे। बलौदाबाजार से एयरपोर्ट की दूरी 50 किलोमीटर से कम तथा बेमेतरा से लगभग 80 किलोमीटर बताई गई है।

जन संघर्ष समिति ने कहा कि राज्य में केवल एक 4सी श्रेणी का एयरपोर्ट होने से विकास का लाभ सीमित क्षेत्रों तक सिमट गया है। राज्य गठन के बाद अधिकांश निवेश रायपुर-दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में केंद्रित रहा, जबकि उत्तर छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से कोयला खदानों और बिजली परियोजनाओं औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित हैं। इससे पर्यावरणीय असंतुलन और विस्थापन जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं।

समिति का कहना है कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों 
को समान विकास अवसर उपलब्ध कराने के लिए मजबूत हवाई संपर्क जरूरी है। समिति का धरना रविवार को भी जारी रहा।

धरने में रवि बनर्जी, बद्री यादव, परसराम कैवर्त, समीर अहमद ‘बबला’, रामशरण यादव, मनोज तिवारी, महेश दुबे ‘टाटा’, देवेंद्र सिंह ठाकुर, शैलेन्द्र यादव, अनिल गुलहरे, दीपक कश्यप, गोपी राव, अमर बजाज, संदीप बाजपेयी, मझहर खान, रंजीत सिंह खनूजा, प्रतीक तिवारी, ऋषिराज सिंह गौतम और अखिल अली सहित अनेक लोग शामिल हुए।


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