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नयी दिल्ली, 4 जून। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की उस याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया जिसमें पहलवान विनेश फोगाट को चयन के लिए ट्रायल में भाग लेने की अनुमति देने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।
न्यायालय ने कहा कि बाद के घटनाक्रम के मद्देनजर याचिका अब निरर्थक हो गई है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने उच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि यह नहीं माना जाना चाहिए कि इस अदालत ने आदेश में दी गई टिप्पणियों और निष्कर्षों को दोहराया है।
उच्च न्यायालय के आदेश में ‘‘आपत्तिजनक’’ टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिए बिना, पीठ ने कहा कि सभी कानूनी प्रश्नों को अभी खुला रखा गया है और डब्ल्यूएफआई की याचिका खारिज कर दी।
डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी एन गोवर्धन ने बताया कि फोगाट को चयन के लिए ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने पीठ से कहा, ‘‘वह सफल नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने वहां काफी हंगामा किया।’’
पीठ ने कहा कि मामला अब बेमानी हो गया है।
गोवर्धन ने कहा कि उच्च न्यायालय ने महासंघ के फैसलों को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं और इन्हें ‘‘दुर्भावनापूर्ण’’ और ‘‘निंदनीय’’ करार दिया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘ये सभी टिप्पणियां हटाई जानी चाहिए क्योंकि मामला अभी एकल पीठ के समक्ष लंबित है।’’
इसके बाद शीर्ष अदालत ने इन कानूनी प्रश्नों को फिलहाल खुला रखते हुए याचिका को निष्प्रभावी मानकर निस्तारित कर दिया।
दरअसल, 29 मई को उच्च न्यायालय ने फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के लिए 30 और 31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी। डब्ल्यूएफआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 22 मई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले से निपटने के उच्च न्यायालय के तरीके पर भी चिंता व्यक्त की थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 22 मई को विनेश फोगाट को चयन के लिए ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी।
अदालत फोगाट की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने 18 मई को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें डब्ल्यूएफआई द्वारा ‘अयोग्य’ घोषित किए जाने के बावजूद इस वर्ष के एशियाई खेलों के लिए चयन ट्रायल्स में उनकी भागीदारी के मुद्दे पर उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
डब्ल्यूएफआई ने डोपिंगरोधी नियमों के तहत संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए छह महीने की अनिवार्य नोटिस अवधि का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून, 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।
फोगाट ने डब्ल्यूएफआई के इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया और गोंडा में आयोजित ‘नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट’ में हिस्सा लेने के लिए पहुंच गईं।
वर्ष 2023 में डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर लगे कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के ख़िलाफ महिला पहलवानों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन में फोगाट ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
अगस्त 2024 में सुबह वजन करने के दौरान 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण उन्हें 50 किलोग्राम वर्ग के ओलंपिक फाइनल से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। (भाषा)


