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सफाईकर्मी होने भर से नहीं ठुकराई जा सकती अनुकंपा नियुक्ति, हाईकोर्ट का अहम फैसला
02-Jun-2026 1:23 PM
सफाईकर्मी होने भर से नहीं ठुकराई जा सकती अनुकंपा नियुक्ति, हाईकोर्ट का अहम फैसला

परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति जांचे बिना आवेदन खारिज करना गलत, नगर निगम की अपील खारिज
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 2 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि परिवार के किसी सदस्य के सरकारी नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। यदि परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है, तो उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन किए बिना आवेदन खारिज करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अंबिकापुर नगर निगम की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का मूल उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक उत्पन्न आर्थिक संकट से उबारना है और अधिकारियों को इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पिता अंबिकापुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री थे, जो उनकी आय पर निर्भर थे।

पिता की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत आवेदन किया, लेकिन यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया गया कि उसकी मां पहले से सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पुनर्विचार की मांग की और यह भी बताया कि समान परिस्थितियों वाले अन्य लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी जा चुकी है।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां एकलपीठ ने नगर निगम के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए नगर निगम आयुक्त ने खंडपीठ में अपील दायर की।

नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2013 की नीति के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसकी मां का वेतन बेहद कम है और पूरे परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता का आवेदन केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसकी मां सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। अधिकारियों ने यह जांचने की कोशिश ही नहीं की कि परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है और मृत कर्मचारी की आय बंद होने के बाद परिवार किन परिस्थितियों का सामना कर रहा है।

अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन यह एक मानवीय और कल्याणकारी व्यवस्था है। इसलिए केवल तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना योजना के उद्देश्य के विपरीत होगा।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि किसी परिवार के एक सदस्य का कम वेतन वाले पद पर कार्यरत होना यह साबित नहीं करता कि परिवार आर्थिक संकट से बाहर आ चुका है। प्रत्येक मामले में परिस्थितियों का अलग-अलग मूल्यांकन आवश्यक है।

खंडपीठ ने माना कि परिवार ने अपने मुख्य कमाऊ सदस्य को खो दिया था और ऐसे में केवल मां की नौकरी को आधार बनाकर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने नगर निगम अंबिकापुर की अपील खारिज कर दी और एकलपीठ के आदेश को यथावत रखते हुए याचिकाकर्ता को राहत बरकरार रखी।


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