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हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 2 जून। महिला एवं बाल विकास विभाग की एक दिव्यांग महिला कर्मचारी को बिलासपुर से लगभग 546 किलोमीटर दूर बीजापुर स्थानांतरित किए जाने का मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एन.के. व्यास की एकलपीठ में हुई। याचिका में महिला कर्मचारी ने अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए बिलासपुर अथवा निकटवर्ती किसी उपयुक्त स्थान पर पदस्थापना की मांग की है।
याचिका के अनुसार पूर्णिमा उपाध्याय महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में बिलासपुर में पदस्थ हैं। राज्य शासन ने 30 मई 2026 को जारी आदेश के तहत उनका तबादला एकीकृत बाल विकास परियोजना (आईसीडीपी) बीजापुर में कर दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह 42 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित हैं। इस संबंध में मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र तथा सक्षम प्राधिकारी का दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी अभिलेख पर प्रस्तुत किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 30 अगस्त 2010 को एक परिपत्र जारी कर दिव्यांग कर्मचारियों को उनके गृह जिले अथवा निकटस्थ स्थानों पर पदस्थ करने का प्रावधान किया था, ताकि उन्हें आवागमन और कार्यस्थल से जुड़ी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
इसके बावजूद विभाग ने उन्हें बिलासपुर से सीधे बीजापुर स्थानांतरित कर दिया, जो लगभग 546 किलोमीटर दूर स्थित है। याचिका में कहा गया है कि इतनी लंबी दूरी पर तबादला किए जाने से उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए गंभीर असुविधा और परेशानी उत्पन्न होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि स्थानांतरण आदेश राज्य सरकार की घोषित नीति और दिव्यांग कर्मचारियों को दी गई विशेष सुरक्षा के विपरीत है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि याचिकाकर्ता को बिलासपुर या उसके आसपास किसी उपयुक्त स्थान पर पदस्थ किया जाए।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले पर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब शासन के जवाब के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।


