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भीषण गर्मी ने मरवाही के जंगल में मादा भालू की ली जान
02-Jun-2026 11:18 AM
भीषण गर्मी ने मरवाही के जंगल में मादा भालू की ली जान

पोस्टमार्टम में हीट स्ट्रोक की पुष्टि, वन विभाग का दावा- जंगल में पानी की कमी नहीं

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

पेंड्रा-गौरेला-मरवाही, 2 जून। लगातार बढ़ते तापमान का असर अब वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। मरवाही वन मंडल के जंगल में पांच वर्षीय मादा भालू की मौत ने वन्यजीव संरक्षण और जंगलों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भालू की मौत का कारण हीट स्ट्रोक बताया गया है।

मरवाही रेंज के पिपरिया गांव से लगे जंगल में वन कक्ष क्रमांक 1975 में मादा भालू का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सबसे पहले जंगल गए कुछ ग्रामीणों ने शव देखा और इसकी सूचना वन अमले को दी। बताया जाता है कि घटना की जानकारी मिलने तक क्षेत्रीय वन कर्मचारियों को भी इसकी भनक नहीं थी।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में शिकार या अंग तस्करी की आशंका भी जताई गई, क्योंकि क्षेत्र में पहले वन्यजीव शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि जांच के दौरान राहत की बात यह रही कि मादा भालू के सभी अंग सुरक्षित पाए गए और कहीं भी अवैध शिकार के संकेत नहीं मिले।

इसके बाद पंचनामा कार्रवाई पूरी कर पशु चिकित्सक की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि अत्यधिक गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण भालू की मौत हुई। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया एसडीओ की उपस्थिति में संपन्न कराई गई।

मादा भालू की मौत के बाद जंगलों में जल स्रोतों की स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि वन विभाग ने पानी की कमी की आशंका को खारिज किया है। विभाग का कहना है कि घटना स्थल के आसपास प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं और उनमें पर्याप्त पानी उपलब्ध है।

मरवाही वन मंडल की डीएफओ ग्रीष्मी चांद ने बताया कि पिपरिया के समीप जंगल में एक मादा भालू का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हीट स्ट्रोक को मौत का कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों की स्थिति की समीक्षा कराई गई है और कहीं भी जल संकट की जानकारी नहीं मिली है। इसके बावजूद वन्यजीवों के लिए उपलब्ध पानी और अन्य व्यवस्थाओं का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।


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