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बैगा गांवों में पहुंचकर योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी, 30 मई तक डिजिटल सर्वे पूरा करने के निर्देश
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 28 मई। जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि वोरा ने बुधवार को कोटा विकासखंड के बैगा बहुल गांव शिवतराई और नेवसा का दौरा कर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पीएम जनमन, धरती आबा अभियान, पीवीटीजी डिजिटल सर्वे और सुशासन तिहार जैसी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
अचानकमार क्षेत्र के दूरस्थ गांव बैगापारा पहुंचकर प्रमुख सचिव ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और योजनाओं से मिलने वाले लाभ की जानकारी ली। शिवतराई में उन्होंने स्वयं सर्वे सेतु ऐप के जरिए तिहारू बैगा के परिवार का डिजिटल सर्वे किया। परिवारों की आजीविका, आवास, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं तक पहुंच को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
नेवसा गांव में पीएम-जनमन योजना के तहत बनी सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए तकनीकी टीम के साथ सड़क की ड्रिलिंग कराई गई। सड़क की मोटाई और निर्माण सामग्री के नमूने लिए गए। करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी यह सड़क शिवतराई-अचानकमार मुख्य मार्ग से बैगापारा तक पहुंच आसान बनाती है। ग्रामीणों ने बताया कि अब बरसात में आने-जाने की परेशानी काफी कम हो जाएगी।
दौरे के दौरान गांव में मोबाइल मेडिकल यूनिट भी पहुंची। प्रमुख सचिव ने बैगा समुदाय के लोगों से वाहन की उपयोगिता के बारे में पूछा, जिस पर ग्रामीणों ने इसे बेहद लाभकारी बताया। इसके बाद उन्होंने मेडिकल यूनिट की नियमित गांवों में आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नेवसा स्थित आदिवासी बालक आश्रम के औचक निरीक्षण के दौरान आश्रम परिसर, शौचालय और साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब मिली। इस पर प्रमुख सचिव ने नाराजगी जताते हुए छात्रावास अधीक्षक रवि पाठक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी आश्रमों और छात्रावासों में साफ-सफाई, पेयजल, बिजली और मरम्मत कार्य समय पर पूरा करने को कहा।
बाद में जनपद पंचायत कोटा में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पीवीटीजी डिजिटल सर्वे की प्रगति पर चर्चा करते हुए उन्होंने 30 मई तक शत-प्रतिशत सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों पीवीटीजी समुदायों के विकास को लेकर संवेदनशील हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कोई भी पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। साथ ही पीवीटीजी परिवारों के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।


