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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 28 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीपत सेवा सहकारी समिति की प्राधिकारी तुलसी देवी कौशिक को पद से हटाए जाने के मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कानून में अपील का वैकल्पिक प्रावधान उपलब्ध है, तब सीधे रिट याचिका पर सुनवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ता को छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 78 के तहत सक्षम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष 30 दिनों के भीतर अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि तय समयसीमा के भीतर अपील दायर की जाती है, तो उसे विलंब के आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा और मामले का गुण-दोष के आधार पर परीक्षण किया जाएगा।
सीपत निवासी 64 वर्षीय तुलसी देवी कौशिक की ओर से अधिवक्ता सीमा सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 14 नवंबर 2024 को धारा 49(ए) के तहत प्राधिकृत अधिकारी के रूप में की गई थी। लेकिन 28 अप्रैल 2026 को उप पंजीयक सहकारिता, बिलासपुर ने आदेश जारी कर उनकी नियुक्ति निरस्त करते हुए पद से हटा दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत की गई, क्योंकि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
वहीं राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आर.के. गुप्ता तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से अधिवक्ता शालीन सिंह बघेल ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि अधिनियम में प्रभावी अपील व्यवस्था उपलब्ध है, इसलिए सीधे हाईकोर्ट में दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। साथ ही लंबित अंतरिम आवेदन भी समाप्त कर दिए गए।


