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तस्वीर / ‘छत्तीसगढ़’ / विमल मिंज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 22 मई। नक्सलवाद के कमजोर पडऩे के बाद सरकार ने बस्तर में पर्यटन विकास पर फोकस बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में चित्रकोट जलप्रपात के पास गुजरात के केवडिय़ा मॉडल पर टेंट सिटी विकसित करने की तैयारी की जा रही है। देश के बड़े उद्योग समूह टाटा ने बस्तर और सरगुजा में पर्यटन निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिस पर राज्य सरकार जल्द फैसला ले सकती है।
बस्तर में शांति बहाली के बाद पर्यटन की अपार संभावनाएं खुली हैं। दर्जनों जलप्रपात, प्राकृतिक सौंदर्य और आदिवासी संस्कृति देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है। केंद्र सरकार भी बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग कर रही है और राज्य से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक राज्य पर्यटन मंडल ने चित्रकोट जलप्रपात के पास लगभग 9 एकड़ भूमि पर टेंट सिटी विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए जमीन भी चिन्हित कर ली गई है। बताया गया कि पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा और अधिकारियों ने गुजरात के टेंट सिटी नर्मदा का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं और सुविधाओं का अध्ययन किया। यह टेंट सिटी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित है और पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय मानी जाती है।
इधर, टाटा समूह ने बस्तर और सरगुजा में पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स को लीज पर लेकर विकसित करने की इच्छा जताई है। पर्यटन मंडल के पास वर्तमान में 17 होटल और रिसॉर्ट हैं। पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने ‘छत्तीसगढ़’ से बताया कि समूह के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है और अंतिम निर्णय राज्य शासन को लेना है।
बताया गया कि टाटा समूह ने सिर्फ होटल-रिसॉर्ट संचालन ही नहीं, बल्कि हवाई संपर्क सुविधाएं विकसित करने में भी रुचि दिखाई है। यही नहीं, मेफेयर होटल्स एंड रिसॉर्ट्स ने भी बस्तर में नए होटल और रिसॉर्ट विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा सरगुजा और जशपुर क्षेत्र में भी कई निजी निवेशकों ने पर्यटन परियोजनाओं में दिलचस्पी दिखाई है।
सूत्रों का कहना है कि निवेशकों की रुचि को देखते हुए सरकार पर्यटन नीति में कुछ संशोधन कर सकती है। इस सिलसिले में जल्द ही कैबिनेट स्तर पर फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।


