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-इमरान क़ुरैशी
कर्नाटक साइबर कमांड पुलिस (केसीसीपी) के मुताबिक, बेंगलुरु में एक फ़र्जी टैक्स सलाहकार कंपनी के चार कॉल सेंटरों ने कथित तौर पर नकली टैक्स सलाह देकर 'हज़ारों अमेरिकी नागरिकों' के साथ ठगी की है.
रेकनिंग सर्विस लिमिटेड के नाम से चलाए जा रहे ये कॉल सेंटर, अमेरिका की मशहूर टैक्स सलाह और सॉफ्टवेयर कंपनी क्विक बुक बनकर काम कर रहे थे. केसीसीपी ने कहा कि ये लोग अमेरिकी नागरिकों को नकली टैक्स सलाह, लाइसेंस और रिन्यूअल से जुड़ी जानकारी दे रहे थे.
केसीसीपी ने कहा, ''इन फर्जी सेवाओं के बदले ये लोग धोखाधड़ी कर भारी रकम फीस के तौर पर वसूल रहे थे.''
केसीसीपी के महानिदेशक प्रणब मोहंती ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, ''हमने दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उन करीब 120 कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रहे हैं जो चार कॉल सेंटरों में काम करते थे. छापेमारी के दौरान तैयार स्क्रिप्ट मिली हैं, इसलिए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे अमेरिकी नागरिकों के साथ ठगी में शामिल थे.''
साइबर कमांड पुलिस की टीमों ने दो दिन पहले छापेमारी शुरू की थी और अमेरिकी नागरिकों के साथ ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे आपत्तिजनक सामान और गैजेट बरामद किए. इनमें 44 एसएसडी, दो मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, नौ सीपीयू और वे स्क्रिप्ट शामिल हैं जिन्हें कॉल सेंटर एजेंट ग्राहकों को अपनी ठगी पर भरोसा दिलाने के लिए पढ़ते थे.
इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें दिल्ली के प्रशांत और उत्तर प्रदेश के आकाश गुप्ता शामिल हैं. पुलिस को शक है कि वे मिडिल लेवल के एग्जीक्यूटिव हैं और मुख्य मालिकों का जल्द पता लगाया जाएगा.
साइबर कमांड ने कहा कि अभियुक्तों ने 'सर्कल स्क्वायर' नाम की कंपनी बनाई थी और ''कथित तौर पर अलग-अलग शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर अमेरिकी नागरिकों से धोखाधड़ी के जरिए भारी रकम वसूली की.''
पुलिस ने क्या बताया
मोहंती ने पत्रकारों से कहा, ''शहर के कई बैंकों में इनके खाते थे जिनमें कुल रकम 40 करोड़ रुपये तक पहुंचती है. यह रकम सिर्फ कुछ महीनों की है. हमें नहीं लगता कि उन्होंने यह पैसा सिर्फ पिछले चार या पांच महीनों में कमाया होगा. कॉल सेंटर कर्मचारी अमेरिकी अधिकारी बनकर भोले-भाले अमेरिकी नागरिकों को ठग रहे थे.''
यह पहला मामला नहीं है जब बेंगलुरु में कोई फर्जी कॉल सेंटर चल रहा था.
अक्तूबर 2025 में बेंगलुरु पुलिस ने एक कॉल सेंटर पर छापा मारा था, जो एक पुलिस स्टेशन से 200 मीटर से भी कम दूरी पर स्थित था. इसका इस्तेमाल अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को धमकाकर पैसे वसूलने के लिए किया जाता था. इस मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. ये लोग अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को यह झूठा आरोप लगाकर धमका रहे थे कि उनके भेजे गए पार्सल में प्रतिबंधित सामान या ड्रग्स पकड़े गए हैं.
नवंबर 2025 में एक फर्जी माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट कॉल सेंटर पर भी छापेमारी हुई थी, जिसमें 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
मोहंती ने कहा कि क्विक बुक बनकर काम कर रही इस कंपनी पर की गई छापेमारी, अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) बॉस्टन की सोशल मीडिया पोस्ट से काफी अलग है.
एफबीआई बॉस्टन ने बुधवार शाम को ट्वीट कर कहा था कि उसने भारत में चल रहे एक कॉल सेंटर ऑपरेशन को बंद कर दिया है, जिसने अमेरिका और दूसरे देशों में सैकड़ों बुजुर्ग लोगों के साथ टेक सपोर्ट स्कैम के जरिए लाखों डॉलर की ठगी की थी. (bbc.com/hindi)


