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16 सप्ताह की प्रैग्नैंसी समाप्त कराने का आदेश, भ्रूण का डीएनए सैंपल रहेगा सुरक्षित
22-May-2026 11:26 AM
16 सप्ताह की प्रैग्नैंसी समाप्त कराने का आदेश, भ्रूण का डीएनए सैंपल रहेगा सुरक्षित

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 22 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने 14 से 16 सप्ताह की गर्भवती पीड़िता को गर्भसमापन की अनुमति देते हुए प्रशासन को तत्काल सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ में हुई। अदालत ने आदेश दिया कि पीड़िता को तुरंत सिम्स अथवा जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाए और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में सुरक्षित गर्भपात कराया जाए। साथ ही, आरोपी के खिलाफ लंबित आपराधिक प्रकरण को देखते हुए मेडिकल टीम को भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

पीड़िता ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया था कि आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई। मामले में सिविल लाइन थाना में अपराध दर्ज है। पीड़िता ने अदालत को बताया कि यह अवांछित गर्भ उसके लिए मानसिक तनाव, सामाजिक कलंक और असहनीय पीड़ा का कारण बन गया है। उसने कहा कि वह उस व्यक्ति के बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती, जिसने उसकी अस्मिता को ठेस पहुंचाई।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच कर रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि पीड़िता 14 से 16 सप्ताह की गर्भवती है। मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने गर्भसमापन की अनुमति प्रदान कर दी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रतिलिपि तत्काल बिलासपुर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिम्स के डीन को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि बिना देरी आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया पूरी की जा सके।


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