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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 19 मई। वेतन से हर महीने भविष्य निधि की रकम कटने के बावजूद खाते में जमा नहीं होने के मामले में एक व्याख्याता ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर 30 जून तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह याचिका मस्तूरी स्थित पीएम-श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल में पदस्थ व्याख्याता संजय पांडेय ने दायर की है। व्याख्याता ने खुद अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।
याचिका में कहा गया है कि उनके वेतन से हर महीने सीजीपीएफ की राशि काटी जाती रही, लेकिन यह रकम नियमित रूप से उनके जीपीएफ खाते में जमा नहीं की गई। इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर, संयुक्त संचालक शिक्षा रामायण प्रसाद आदित्य और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक सहित कई अधिकारियों को आवेदन देकर रकम जारी कराने की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की पीठ ने प्रारंभिक तौर पर पाया कि याचिकाकर्ता के वेतन से कटौती तो की जा रही थी, लेकिन संबंधित राशि उसके खाते में जमा नहीं हो रही थी। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए राज्य शासन से चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी।
याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि उन्होंने स्कूल के प्राचार्य जयप्रकाश ओझा से कई बार जानकारी मांगी, लेकिन न तो राशि जारी की गई और न ही किसी प्रकार की स्पष्ट जानकारी दी गई।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि ट्रेजरी में चालान के माध्यम से जमा राशि और संबंधित चालानों की प्रतियां मांगने पर प्राचार्य ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। यहां तक कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
व्याख्याता का आरोप है कि प्राचार्य ने उल्टा उनसे यह पूछ लिया कि सरकारी कर्मचारी को चालान की प्रति देने का कौन-सा नियम है। साथ ही, अपीलीय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे पर भी प्राचार्य के पक्ष में कार्रवाई को दबाने का आरोप लगाया गया है।


