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बंगाल जीत में पवन साय की रणनीति कारगर, 56 सीटों में से अधिकांश पर भाजपा को सफलता
04-May-2026 4:57 PM
बंगाल जीत में पवन साय की रणनीति कारगर, 56 सीटों  में से अधिकांश पर भाजपा को सफलता

असम में भी छत्तीसगढ़ के नेता खरे उतरे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 4 मई। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के पीछे प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय की रणनीति को अहम माना जा रहा है। गौर करने लायक बात ये है कि उन्हें 56 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनमें से अधिकांश पर भाजपा को जीत मिली है।

बताया गया है कि पवन साय पिछले करीब पांच महीने से बंगाल में सक्रिय रहे। पार्टी हाईकमान ने उन्हें उन सीटों की जिम्मेदारी दी थी, जहां पहले तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव था। वे सबसे पहले बंगाल पहुंचे थे, जिसके बाद अन्य राज्यों के वरिष्ठ नेताओं की भी तैनाती की गई।

साय ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक रणनीति बनाते हुए अनुराग सिंहदेव, भूपेन्द्र सिंह सवन्नी, नीलू शर्मा, विश्वविजय सिंह तोमर, सौरभ सिंह और जयंती पटेल को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी दी। इसके अलावा पूर्व मंत्री राजेश मूणत और शिवरतन शर्मा को भी विभिन्न सीटों पर तैनात किया गया। विधानसभा सत्र के बाद डिप्टी सीएम विजय शर्मा को भी बंगाल भेजा गया। साय ने छत्तीसगढ़ में रह रहे बंगाली कार्यकर्ताओं को भी चुनावी काम में लगाया और कमजोर माने जा रहे क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं की ड्यूटी सुनिश्चित की। निगम-मंडल के पदाधिकारी भी पिछले दो महीनों से लगातार सक्रिय रहे।

असम में भी छत्तीसगढ़ के नेता खरे उतरे

सूत्रों के अनुसार साय की रणनीति का असर पुरुलिया और वर्धमान जैसे जिलों में दिखा, जहां पहले टीएमसी का दबदबा था। पुरुलिया जिले में भाजपा 7 में से 6 सीट जीतने में सफल रही। बताया जाता है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी सीधे पवन साय के संपर्क में थे। इसका परिणाम यह रहा कि 56 में से अधिकांश सीटें भाजपा के पक्ष में गईं।

भाजपा ने असम में प्रचार के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, डिप्टी सीएम अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी थी। तीनों नेताओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार संभाला, जहां पार्टी को बेहतर प्रदर्शन मिलने की जानकारी सामने आई ।


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