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महिला आरक्षण विधेयक लंबित रहने पर जताई निराशा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 अप्रैल। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने नासिक में सामने आए कथित ढोंगी अशोक खरात से जुड़े मामले को बेहद शर्मनाक बताते हुए इसे महिलाओं के उत्पीड़न का गंभीर उदाहरण बताया है। अपने बिलासपुर दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में अंधविश्वास के खतरनाक प्रभाव को उजागर करती हैं और महिलाओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है।
उन्होंने बुधवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसे ढोंगियों के झांसे में आकर शोषण का शिकार हो जाती हैं। अंधविश्वास हमेशा घातक साबित होता है। किसी पर भरोसा करने से पहले पूरी समझदारी और विवेक जरूरी है, उन्होंने जोर देकर कहा। रहाटकर ने समाज से भी अपील की कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
महिला आरक्षण विधेयक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं दशकों से इस कानून का इंतजार कर रही हैं, लेकिन अब तक इसका पारित न होना महिलाओं के दृष्टिकोण से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुझे भी इस बात का दुख है कि यह विधेयक अभी तक पारित नहीं हो सका, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में इसे लागू किया जाएगा और महिलाओं को नए अवसर मिलेंगे।
राहतकर ने यह भी कहा कि देश की महिलाएं हमेशा से नेतृत्व करती रही हैं। सावित्री बाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर और रानी महालक्ष्मी बाई जैसी महान महिलाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं ने हर दौर में समाज का मार्गदर्शन किया है और वे आरक्षण की हकदार हैं।
उन्होंने तीन-स्तरीय पंचायत व्यवस्था में महिलाओं को दिए गए 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत आरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। बड़ी संख्या में महिलाओं ने नेतृत्व क्षमता साबित की है और कई स्थानों पर वे उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं।
धार्मिक परिवर्तन से जुड़े मामलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रहाटकर ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में महिलाओं के उत्पीड़न की शिकायत मिलती है, तो राष्ट्रीय महिला आयोग इसकी सुनवाई करेगा और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने दोहराया कि महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण देना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।


