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एनएचआरसी ने दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली/रायपुर, 24 अप्रैल । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर हादसे का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सही हैं, तो यह मामला पीड़ितों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। नोटिस में मृतक मजदूरों के परिजनों और घायलों को दिए जा रहे मुआवजे की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है। साथ ही हादसे में घायल 20 मजदूरों के इलाज और स्वास्थ्य की अद्यतन स्थिति पर भी रिपोर्ट तलब की गई है।
इसके अलावा आयोग ने यह भी पूछा है कि हादसे के कारणों की जांच कहां तक पहुंची है और दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल को सक्ती जिले के सिंघनातरई गांव स्थित वेदांता पावर प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में हाई-प्रेशर ट्यूब फटने से यह हादसा हुआ था। घटना के समय वहां 40-50 मजदूर काम कर रहे थे। करीब 600 डिग्री सेल्सियस तापमान की भाप निकलने से कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए।
प्रारंभिक रिपोर्ट में 14 मजदूरों की मौत बताई गई थी, जबकि आयोग की प्रेस विज्ञप्ति में 13 मौत और 20 घायलों का जिक्र है। बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 24 तक पहुंचने की बात सामने आई है।
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए बिलासपुर संभागायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। वहीं केंद्र सरकार की ओर से औद्योगिक सुरक्षा और बॉयलर निरीक्षकों की टीम भी जांच के लिए मौके पर पहुंची है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। आयोग पूरे मामले की निगरानी कर रहा


