ताजा खबर

इज़राइल की मदद कर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ रहा है भारत-UN दूत का बड़ा दावा
21-Apr-2026 6:21 PM
इज़राइल की मदद कर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ रहा है भारत-UN दूत का बड़ा दावा

नई दिल्ली/जिनेवा, 21 अप्रैल। फ़िलिस्तीन के कब्ज़े वाले क्षेत्रों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर और मशहूर मानवाधिकार कानून विशेषज्ञ फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने भारत सरकार की विदेश नीति और इज़राइल को दी जा रही सैन्य मदद पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। 'द हिंदू' अखबार को दिए एक विस्तृत और बेबाक इंटरव्यू में अल्बानीज़ ने आगाह किया है कि भारत की यह भूमिका उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मुश्किलों में डाल सकती है।

"युद्ध अपराधी की मदद करना जुर्म है"

इटली की रहने वालीं अल्बानीज़ ने कहा कि यह बेहद परेशान करने वाली बात है कि भारत, इज़राइल को हथियार और ड्रोन मुहैया करा रहा है। उन्होंने कहा, "इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय  ने वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उन्हें एक अपराधी माना जा रहा है। ऐसे में एक 'युद्ध अपराधी' की मदद करना अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है। भारत को इसकी जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।"

नरसंहार और यातना की भयावह रिपोर्ट

अल्बानीज़ ने इसी साल 23 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में अपनी रिपोर्ट 'यातना और जनसंहार' पेश की है। उन्होंने इसके कुछ रोंगटे खड़े कर देने वाले आंकड़े साझा किए:

गिरफ्तारियाँ: अक्टूबर 2023 से अब तक इज़राइल ने करीब 18,500 फ़िलिस्तीनियों को हिरासत में लिया है।

बच्चों पर जुल्म: इन कैदियों में 1,500 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं।

अमानवीय यातना: रिपोर्ट में बताया गया है कि हिरासत में लिए गए फ़िलिस्तीनियों को नंगा करना, पीटना, उनकी आँखों पर पट्टी बांधकर घंटों गायब कर देना और औरतों-बच्चों का यौन शोषण करना इज़राइली सेना की दिनचर्या बन गया है।

इज़राइल का 'नया कानून' और क्रूरता की हदें

फ्रांसेस्का ने इज़राइल द्वारा हाल ही में बनाए गए नए कानूनों पर भी एतराज जताया। उन्होंने कहा कि यह नया कानूनी ढांचा फ़िलिस्तीनियों की सामूहिक गिरफ्तारी और उन्हें सख्त से सख्त सजा देने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा, "इज़राइल हर दिन अपनी हदें पार कर रहा है। गाजा में जो हो रहा है, उसे किसी भी सैन्य तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता। यह साफ़ तौर पर एक पूरी आबादी को खत्म करने की कोशिश है।"

प्रधानमंत्री मोदी के इज़राइल दौरे और रिश्तों पर टिप्पणी

जब उनसे पीएम मोदी के इज़राइल दौरे और वहां की संसद में उनके संबोधन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे 'अजीब' करार दिया। उन्होंने ऐतिहासिक दावों को चुनौती देते हुए कहा, "इज़राइल से भारत के बहुत पुराने संबंधों की बात कहना ऐतिहासिक रूप से गलत है। इज़राइल तो 70 साल पहले अस्तित्व में ही नहीं था।" उन्होंने दुख जताया कि जिस भारत ने हमेशा उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी, आज वही भारत एक 'दखलंदाज़ ताकत' का साथ दे रहा है।

भारत की सिविल सोसाइटी से अपील

अल्बानीज़ ने इटली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोगों ने अपनी सरकार को फ़िलिस्तीन मुद्दे पर बोलने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने भारतीय जनता से भी अपील की: "मैं चाहूँगी कि भारत के लोग भी इस जुल्म के खिलाफ मुखरता से बात करें और अपनी सरकार से सवाल पूछें। दुनिया ने एक कायर चुप्पी अपना रखी है, लेकिन हम इज़राइल की इन ज्यादतियों पर खामोश नहीं रह सकते।"

"पूरा वर्ल्ड ऑर्डर खतरे में है"

इंटरव्यू के अंत में उन्होंने एक बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इज़राइल की इन हरकतों को नज़रअंदाज़ करना केवल फ़िलिस्तीन के लिए बुरा नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के उस नियम-कायदे को खत्म कर रहा है जिसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था। अगर आज इज़राइल को नहीं रोका गया, तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कानूनों की कोई अहमियत नहीं रह जाएगी।

मुख्य बिंदु जो रिपोर्ट को खास बनाते हैं :

सीधा आरोप: भारत सैन्य मदद भेजकर कानून तोड़ रहा है।

आंकड़ों का सबूत: 18,500 गिरफ्तारियां और नरसंहार का दस्तावेजीकरण।

मुआवजा और जवाबदेही: भारत पर भविष्य में कानूनी कार्रवाई का अंदेशा।

नैतिक सवाल: गांधी और नेहरू के देश की वर्तमान खामोशी पर चोट।


अन्य पोस्ट