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लिंगियाडीह में बेदखली पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
19-Apr-2026 11:49 AM
लिंगियाडीह में बेदखली पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

राजीव गांधी आश्रय योजना के हितग्राहियों को जून तक राहत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 18 अप्रैल। लिंगियाडीह बस्ती के 36 निवासियों को फिलहाल राहत मिल गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके मकानों को तोड़ने और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी। एकलपीठ के न्यायमूर्ति एन.के. चंद्रवंशी ने यह आदेश देते हुए राज्य सरकार और नगर निगम सहित सभी पक्षों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट की ग्रीष्मकालीन छुट्टी के बाद जून में निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नगर निगम लिंगियाडीह की जमीन पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और गार्डन बनाने की योजना के तहत उन्हें हटाना चाहता है। जबकि वे सभी 2019-20 के सर्वे में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पात्र घोषित किए जा चुके हैं और 2022 में प्रीमियम राशि भी जमा कर चुके हैं।

उनका दावा है कि सरकार ने उन्हें उसी जमीन पर पट्टा देने का निर्णय लिया था, लेकिन 2024 में इस निर्णय को लागू नहीं किया गया और अब योजना बदल दी गई।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और नगर निगम के अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास ने दलील दी कि 2023 में सरकारी भूमि के पट्टा नियमों में बदलाव हो चुका है। नए नियमों के तहत वर्तमान स्थान पर पट्टा देना संभव नहीं है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खमतराई क्षेत्र में बहुमंजिला भवन में छोटे आवास देने का प्रस्ताव है। साथ ही यह भी कहा गया कि राजीव गांधी आश्रय योजना अब बंद हो चुकी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, अनिमेष वर्मा और आशीष बेक ने तर्क दिया कि उनकी पात्रता 2023 के नए कानून से पहले तय हो चुकी थी, इसलिए बाद के नियम उनके अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से निवास, चयन और राशि जमा करने के बाद अब उन्हें हटाना कानून और भरोसे दोनों के खिलाफ है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित भूमि मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्र के रूप में दर्ज है। ऐसे में वहां व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाना नियमों के विपरीत है और सार्वजनिक हित में नहीं माना जा सकता।

मालूम हो कि योजना के तहत 503 हितग्राही चयनित किए गए थे, जिनमें से 113 लोगों को हटाने की तैयारी नगर-निगम ने की थी। इनमें से 36 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने अब तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इस मामले में कांग्रेस लगातार धरना प्रदर्शन कर रही है और शहर का यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।


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