ताजा खबर
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 18 अप्रैल। प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को घटिया साड़ी वितरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।
बताया गया है कि प्रदेश के करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को यूनिफॉर्म (साड़ी) के रूप में घटिया गुणवत्ता की साड़ियां वितरित की गई थीं। शिकायतों के बाद अब खराब साड़ियों को वापस लिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये की साड़ियों की सप्लाई खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से की गई थी। बोर्ड ने अपने यहां रजिस्टर्ड सप्लायर्स के बीच टेंडर जारी किया था, जिसमें सूरजपुर जिले के दो बड़े सप्लायर सत्यम गर्ग और केदार अग्रवाल को सप्लाई का काम मिला था।
सूत्रों के मुताबिक लगभग 588 रुपये प्रति साड़ी की दर से सप्लाई का अनुबंध हुआ था। साड़ियां जिलों में पहुंचते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गुणवत्ता को लेकर शिकायतें शुरू कर दीं।
मामले में लक्ष्मी राजवाड़े (महिला एवं बाल विकास मंत्री) ने सभी जिला परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घटिया साड़ियों को वापस लेकर नई साड़ियों की व्यवस्था की जाए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष पद्मावती साहू ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि यूनिफॉर्म के रूप में दी गई साड़ियां गुणवत्ताहीन हैं और सभी जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का काम फील्ड आधारित है, इसलिए उन्हें बेहतर गुणवत्ता का यूनिफॉर्म मिलना चाहिए। साथ ही सुझाव दिया गया है कि सरकार चाहे तो साड़ी के स्थान पर राशि प्रदान कर सकती है, ताकि कार्यकर्ता अपनी पसंद से साड़ी खरीद सकें।
दूसरी ओर, मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि खादी ग्रामोद्योग बोर्ड एक स्वायत्तशासी संस्था है और टेंडर संबंधी निर्णय स्वयं लेती है। उन्होंने बताया कि अभी तक गड़बड़ी की कोई औपचारिक शिकायत उनके पास नहीं पहुंची है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नाराजगी के बाद बोर्ड ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। हालांकि इस मामले में बोर्ड की प्रबंध संचालक रीता यादव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे चर्चा नहीं हो सकी।
विवाद के चलते वर्ष 2025-26 का यूनिफॉर्म वितरण फिलहाल रोक दिया गया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई संभव है।


